RBSE Class 8 Hindi व्याकरण छंद

Rajasthan Board RBSE Class 8 Hindi व्याकरण छंद

RBSE Solutions for Class 8 Hindi

परिभाषा – वर्ण, मात्रा, यति, गति इत्यादि के नियमों से युक्त पद्य-रचना को छंद कहते हैं।
छन्द के दो भेद हैं-

  1. मात्रिक मात्राओं की गणना आधार वाले छन्दों को मात्रिक कहा जाता है। जैसे – दोहा, चौपाई, सोरठा इत्यादि।
  2. वर्णिक वर्गों की संख्या पर आधारित छंद वर्णिक कहलाते हैं। जैसे – कवित्त, सवैया इत्यादि।

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कुछ प्रमुख छंद

1. दोहा – दोहा एक मात्रिक छंद है। इसके प्रथम और तृतीय चरणों में 13-13 तथा द्वितीय और चतुर्थ चरणों में 11-11 मात्रायें होती हैं। अन्त में गुरु लघु होता है।
उदाहरण:
भरतहिं होइ न राज मदु, विधि हरि हर पद पाय।
कबहूँ कि काँजी सीकरनि छीर सिंधु बिनसाय।।

2. सोरठा – सोरठा के प्रथम और तृतीय चरणों में 11-11 तथा द्वितीय और चतुर्थ चरणों में 13-13 मात्रायें होती हैं। अंत में तुक नहीं मिलती है।
उदाहरण:
मूरख हृदय न चेत, जो गुरु मिलहिं विरंचि सम।
फूरहिं फरहिं न बेंत, जदपि सुधा बरसहिं जलद।।

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3. चौपाई – इसमें चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 1616 मात्रायें होती हैं। अंत में 51 लघु नहीं होता।
उदाहरण:
मिलन प्रीति किमि जाइ बखानी।
कवि कुल अगम करम मन बानी।।

4. रोला – इसके प्रत्येक चरण में 24 मात्रायें होती हैं। 1113 मात्राओं पर यति होती है।
उदाहरण:
पर सहसा यह रूप देख होता है विस्मय।
आर्य लोग क्या एक समय थे ऐसे निर्भय।।
क्या हम सब जो आज बने हैं निर्बल कामी।
रहते थे स्वाधीन, समर में होकर नामी।।

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5. कुंडलियाँ – इसमें पहली दो पंक्तियाँ दोहे की तथा बाद की चार पंक्तियाँ रोला की होती हैं। यह छः पंक्तियों का छंद है। यह जिस शब्द से आरंभ होता है उसी शब्द से इसका अंत होता है। इसकी दूसरी पंक्ति की अंतिम आधा भाग तथा तीसरी पंक्ति का पहला आधा भाग एक समान होते हैं।
उदाहरण:
बिना बिचारै जो करै, सो पाछे पछताय।
काम बिगारै आपनो, जग में होत हँसाय।।
जग में होत हँसाय, चित्त में चैन न पावै।
खानपान सम्मान, राग-रंग मनहिं न भावै।।
कह गिरधर कविराय, दुख कछु टरत न टारे।
खटकत है जिय माँहि, करै जो बिना बिचारे।।

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बहुविकल्पात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
छः पंक्तियों का छंद है…..
(क) दोहा
(ख) सोरठा
(ग) चौपाई
(घ) कुंडलियाँ।
उत्तर:
(घ) कुंडलियाँ।

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प्रश्न 2.
प्रथम तथा तृतीय चरण में 11-11 मात्राओं वाला छंद है
(क) सोरठा
(ख) दोहा
(ग) चौपाई
(घ) रोला।
उत्तर:
(क) सोरठा

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प्रश्न 3.
16-16 (प्रत्येक चरण में) मात्राओं वाला छंद है
(क) सोरठा
(ख) चौपाई
(ग) दोहा
(घ) रोला।
उत्तर:
(ख) चौपाई

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अतिलघु/लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 4.
दोहा छंद का एक उदाहरण दीजिये।
उत्तर:
दोहा छंद का उदाहरणरे नृप बालक कालबस बोलत तोहि न सँभार। धनुहीं सम त्रिपुरारि धनु, विदित सकल संसार।।

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प्रश्न 5.
सोरठा छंद दोहा छंद से किस प्रकार भिन्न होता
उत्तर:
दोहा छंद के अंत में तुक मिलती है, सोरठा में नहीं। दोहा के पहले और तीसरे चरणों में 13-13 मात्रायें होती हैं तो सोरठा के दूसरे और चौथे चरणों में 13-13 मात्रायें होती हैं। दोहा के दूसरे-चौथे चरणों तथा सोरठा के पहले-तीसरे चरणों में 11-11 मात्रायें होती हैं।

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प्रश्न 6.
‘चौपाई’ छंद का एक उदाहरण दीजिये।
उत्तर:
उदाहरण:
अगहन दिवस धरा निसि बाढ़ी।
गाढ़ी रैन जाइ किमि काढ़ी।

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