RBSE Class 8 Hindi व्याकरण अलंकार

Rajasthan Board RBSE Class 8 Hindi व्याकरण अलंकार

RBSE Solutions for Class 8 Hindi

परिभाषा – कविता की शोभा और सुंदरता को बढ़ाने वाले धर्म को अलंकार कहते हैं।
अलंकार के दो प्रमुख भेद हैं-
(क) शब्दालंकार
(ख) अर्थालंकार।

(क) शब्दालंकार – जहाँ काव्य की सुंदरता उसमें प्रयुक्त शब्दों के कारण होती है, वहाँ शब्दालंकार होता है। प्रयुक्त शब्द को हटाकर उसका पर्यायवाची शब्द रखने पर शब्दालंकार
नष्ट हो जाता है।

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(ख) अर्थालंकार – जहाँ काव्य की सुंदरता उसके अर्थ पर निर्भर होती है, वहाँ अर्थालंकार होता है। प्रयुक्त शब्द के स्थान पर उसका समानार्थी शब्द रखने पर भी अर्थालंकार दीप्त नहीं होता है।

शब्दालंकार : प्रमुख भेद

(1) अनुप्रास अलंकार – जहाँ एक ही वर्ण बार-बार आता है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। जैसे-

  • चारु चंद्र की चंचल किरणें
    खेल रही थीं जल थल में। (‘च’ की आवृत्ति)
  • तरनि तनूजा तरु तमाल तरुबर बहु छाये।
    (‘त’ वर्ग की आवृत्ति)

(2) यमक अलंकार – जहाँ एक ही शब्द बार-बार प्रयुक्त होता है किंतु उसका अर्थ भिन्न-भिन्न होता है, वहाँ यमक अलंकार होता है। जैसे-कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय। या खाये बौराय जग, वा पाए बौरय।। नोट-यहाँ प्रथम ‘कनक’ का अर्थ धतूरा तथा द्वितीय कनक का अर्थ सोना है।

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(3) श्लेष अलंकार-श्लेष का अर्थ है-चिपकना। जहाँ शब्द का प्रयोग तो एक बार ही होता है किंतु उसके अर्थ एक से अधिक होते हैं, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।

जैसे-सुबरन को खोजत फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर। नोट-यहाँ ‘सुवरन’ के तीन अर्थ हैं-कवि के लिए सुंदर वर्ण, व्यभिचारी के लिए गोरा रंग तथा चोर के लिए स्वर्ण या सोना।

अर्थालंकार : प्रमुख भेद

1. उपमा अलंकार-उपमा का अर्थ है समानता। जब उपमेय की उपमान से किसी समान गुण के कारण समानता व्यक्त की जाती है, तो वहाँ उपमा अलंकार होता है। उपमा अलंकार के चार अंग हैं-

  • उपमेय-जिसकी उपमा दी जाय।
  • उपमान-जिससे तुलना की जाय।
  • वाचक शब्द-उपमा प्रकट करने वाले शब्द जैसेसम, वत, समान आदि।
  • साधारण धर्म-दोनों में मिलने वाला समान गुण।

उदाहरण:
पीपर पात सरिस मन डोला। इसमें उपमेय-मन, उपमान-पीपर पात, वाचक शब्द-सरिस तथा साधारण धर्म- डोला (हिलना, काँपना) पूर्ण उपमा अलंकार है।

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2.रूपक अलंकार – उपमेय में उपमान का भेदरहित आरोप होने पर रूपक अलंकार होता है। यहाँ उपमेय और उपमान में कोई भेद नहीं होता।
उदाहरण

  • चरण-कमल बंदी हरि राई। यहाँ चरण (उपमेय) तथा कमल (उपमान में भेद नहीं है।
  • मंद मंद आबतु चल्यौ कुंजर कुंज समीर। यहाँ समीर (उपमेय) में कुंजर (हाथी) उपमान) का आरोप है। दोनों में अभेद है।

(3) उत्प्रेक्षा अलंकार-जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। उनके वाचक-चिह्न हैं-मानहुँ, मनहुँ, मनु, जनु, जानहुँ इत्यादि।
उदाहरण:

  • हरसहि निरखि रामपद अंका। मानहुँ पारसु पायहु रंका। यहाँ राम के पद अंक (उपमेय) अर्थात् चरण-चिहनों में पारस (उपमान) होने की संभावना व्यक्त हुई है।
  • सोहत ओढ़े पीत पट स्याम सलौने गात।
    मनो नीलमणि सैल पर आतप पर्यो प्रभात।।

श्रीकृष्ण के साँवले शरीर (उपमेय) में नीलमणि पर्वत (उपमान) की संभावना व्यक्त हुई है।

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4. अतिशयोक्ति अलंकार-जब किसी बात का वर्णन आवश्यकता से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर किया जाता है, वहाँ अतिशयोक्ति (अतिशय + उक्ति) अलंकार होता है।
उदाहरण:
हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग।
लंका सारी जल गई गए निसाचर भाग।।

5. संदेह अलंकार – जहाँ समानता के कारण एक वस्तु में दूसरी वस्तु होने का संदेह हो अर्थात् निश्चय न हो सके वहाँ संदेह अलंकार होता है।
उदाहरण:
सारी बिच नारी है कि नारी बिच सारी है नारी ही की सारी है कि सारी ही की नारी है। (यहाँ द्रोपदी की बढ़ती हुई साड़ी के कारण नारी और सारी में संदेह हो रहा है।

6. भ्रांतिमान अलंकार-जहाँ उपमान के समान उपमेय को देखकर उपमान का निश्चित भ्रम हो वहाँ भ्रांतिमान अलंकार होता है। भ्रांतिमान में निश्चय तो होता है किंतु वह सही नहीं होता।
उदाहरण:
बिल विचारि प्रविसन लग्यौ, नाग-सुण्ड में व्याल। ताहू कारी ऊख भ्रम, उठा लियो तत्काल। (साँप को हाथी की सैंड़ में अपने बिल का तथा हाथी को साँप में काले | गन्ने का भ्रम हो रहा है।

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बहुविकल्पात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
‘मोहनी मूरति साँवरि सूरति नैना बने बिसाल’ में अलंकार है…….
(क) श्लेष
(ख) यमक
(ग) उपमा
(घ) अनुप्रास।
उत्तर:
(घ) अनुप्रास।

प्रश्न 2.
शब्द के बार-बार आने पर उसके अर्थ भी भिन्नभिन्न हों तो अलंकार होता है
(क) यमक
(ख) श्लेष
(ग) रूपक
(घ) उपमा।
उत्तर:
(क) यमक

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प्रश्न 3.
उपमा अलंकार है
(क) मोर मुकुट मकराकृत कुंडल
(ख) पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सों पग धोये।
(ग) करिकर सरिस सुभग भुज दंडा
(घ) धोती फटी-सी लटी दुपटी
उत्तर:
(ग) करिकर सरिस सुभग भुज दंडा

अति लघु/लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 4.
रूपक अलंकार की परिभाषा एवं उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
जहाँ उपमेय और उपमान में भेद नहीं रहता अर्थात् उपमेय में उपमान का भेदरहित आरोप होता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है।
उदाहरण:
उदित उदय गिरि मंच पर, रघुवर बाल पतंग। बिगसे सन्त सरोज सब, हरसे लोचन भंग।।

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प्रश्न 5.
उत्प्रेक्षा अलंकार का उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गये।
हिम के कणों से पूर्ण मानो, हो गये पंकज नये।।

प्रश्न 6.
अतिशयोक्ति अलंकार की सोदाहरण परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
जहाँ किसी बात का बहुत बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया जाता है कि वह असंभव लगने लगता है, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है। उदाहरण – देखि सुदामा की दीन दशा करुना करिकै करुणानिधि रोये। पानी परात को हाथ छुयौ नहिं नैनन के जल सौं पग धोये।

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प्रश्न 7.
श्लेष अलंकार का एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
श्लेष अलंकार का उदाहरण:
चिरजीवौ जोरी जुरै, क्यों न सनेह गंभीर।
को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के वीर।।

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