RBSE Class 8 Hindi रचना सड़क सुरक्षा एवं परिवेशीय सजगता

Rajasthan Board RBSE Class 8 Hindi सड़क सुरक्षा एवं परिवेशीय सजगता

RBSE Solutions for Class 8 Hindi

सड़क सुरक्षा

सड़क पर आए दिन दुर्घटनाएँ होती रहती हैं। अत: हमें सड़क पर सावधानीपूर्वक चलना चाहिए। सड़क पर चलते समय फुटपाथ का उपयोग करना चाहिए। यदि फुटपाथ किसी कारण खाली न हो तो सड़क के दाहिनी ओर चलना चाहिए, ताकि सामने से आने वाले वाहनों से बचा जा सके। स्कूल की बस में चढ़ते समय दूसरे छात्रों का भी ध्यान रखना चाहिए। छोटे बच्चों को पहले चढ़ने देना चाहिए।

बस में चढ़ते समय एक-दूसरे को धक्का नहीं देना चाहिए, साथ ही पक्तिबद्ध होकर चढ़ना चाहिए। बस पूरी तरह रुक जाए तभी बस से नीचे उतरना चाहिए। उतरते समय जल्दबाजी, धक्कामुक्की नहीं करनी चाहिए। बस में सीट पर बैठने के लिए झगड़ना नहीं चाहिए। बस के अन्दर अनुशासन से बैठना चाहिए। अपने किसी अंग को खिड़की से बाहर नहीं निकालना चाहिए।

चलती बस में सड़क पर कूड़ा नहीं फेंकना चाहिए। जोर-जोर से बातें करके या शोर मचाकर चालक का ध्यान नहीं बँटाना चाहिए। तेज आवाज में संगीत नहीं सुनना चाहिए। चौराहों या तिराहों पर सड़क के बीच में एक खंभे पर तीन बत्तियाँ लगी होती हैं, इनमें तीन रंग होते हैं लाल रंग रुकने का, पीला रंग लाल बत्ती होने का तथा हरा रंग आगे बढ़ने का संकेत देता है। यही ट्रैफिक लाइट है। इससे यातायात नियंत्रित होता है।

सड़क के दोनों ओर खंभे पर लगी बत्ती में एक आदमी का चित्र होता है। उसमें हरी बत्ती जलने पर ही पैदल यात्री को जेब्रा क्रॉसिंग से सड़क पार करनी चाहिए। यदि किसी अपाहिज, बुजुर्ग या अंधे व्यक्ति को देखें तो सड़क पार करने में उसकी मदद करनी चाहिए। जेब्रा क्रॉसिंग की हरी बत्ती तभी होती है जब ट्रैफिक लाइट में लाल बत्ती जल रही हो और वाहनों का आवागमन बंद हो।

सड़क पर स्थान-स्थान पर बड़े आकार के नीले बोर्ड लगे रहते हैं, जिन पर आस-पास के स्थानों के नाम लिखे होते हैं जो उस जगह की ओर जाने का संकेत देते हैं। सड़क पर एक बोर्ड पर कार और ट्रक के चित्र बने होते हैं। उनके चित्रों के सामने 50.40 आदि अंक लिखे होते हैं जो वाहन की गति निर्धारित करते हैं। ये अंक स्थान-स्थान के अनुसार बदल जाते हैं अर्थात् वाहनों की गति सीमा (Speed Limit) कम-ज्यादा हो सकती है। यातायात व्यवस्था में सुरक्षा की दृष्टि से सड़क पर सुरक्षित आवागमन के लिए बनाए गए चिह्न व प्रतीक बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं।

इन चिह्नों व प्रतीकों का अर्थ समझकर एवं सावधानीपूर्वक उनका पालन कर हम अपनी यात्रा सकुशल सम्पन्न कर सकते हैं। सड़क सुरक्षा से सम्बन्धित अधिकांश नियम संकेतों एवं प्रतीकों के माध्यम से इसलिए प्रकट किए जाते हैं क्योंकि विभिन्न देशों की भाषाएँ अलग-अलग हैं। ऐसी दशा में वाहन चालकों को भाषा के माध्यम से नियमों को समझने में कठिनाई आती है।

सड़कों पर प्रवेश निषेध, हार्न प्रतिबन्धित, आगे विद्यालय है, पैदल यात्रा प्रतिबन्धित, गति अवरोधक, गति सीमा आदि के प्रतीक व चिह्न पाये जाते हैं। ये समय व स्थिति के अनुसार सुरक्षा का संकेत करते हैं। पैदल यात्रा परिपथ को जेब्रा क्रासिंग भी कहते हैं क्योंकि जहाँ पर यह क्रासिंग होती है वहाँ पर ठीक वैसी ही धारीदार पट्टियाँ बनी होती हैं जैसे जेब्रा पशु के शरीर पर बनी होती हैं।

परिवेशीय सजगता

परिवेशीय सजगता से आशय हमारे आस-पास की गतिविधियों एवं कार्यकलापों के प्रति जागरूकता व सतर्कता बरतने है। इसके अंतर्गत सड़क सुरक्षा जैसा मुख्य विषय तो है ही, इसके अतिरिक्त नित्य जीवन में स्वयं से, परिवार से एवं समाज से संबंधित क्रियाकलाप भी आते हैं, जिनका प्रभाव हमारे जीवन व समाज पर पड़ता है। अतः हमें अपने परिवेश के प्रति सजगता व जागरूकता रखनी चाहिए ताकि हमारा जीवन सुरक्षित व सुखद बन सके।

RBSE Class 8 Hindi सड़क सुरक्षा एवं परिवेशीय सजगता अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1.
पैदल चलते समय हमें सड़क के किस भाग पर चलना चाहिए?
उत्तर:
हमें सड़क के फुटपाथ पर चलना चाहिए।

प्रश्न 2.
सड़क पार करते समय हमें क्या करना चाहिए?
उत्तर:
पैदल सड़क पार करते समय हमें ट्रैफिक लाइट में लाल बत्ती होने पर जेब्रा क्रॉसिंग से सड़क पार करनी चाहिए।

प्रश्न 3.
ट्रैफिक लाइट में कौन-कौन से रंग होते हैं और उनसे क्या संकेत मिलते हैं ?
उत्तर:
ट्रैफिक लाइट में पीली, लाल तथा हरी रंग की तीन बत्तियाँ होती हैं। पीली बत्ती लाल बत्ती के होने का संकेत देती है। लाल बत्ती होने पर वाहन रोकना पड़ता है। हरी बत्ती चालक को आगे बढ़ने का संकेत देती है।

प्रश्न 4.
सड़क पर बनी सफेद और काली धारी वाली पट्टियों को क्या कहते हैं? वहक्यों बनाई जाती हैं?
उत्तर:
सड़क पर बनी सफेद और काली धारी वाली पट्टियों को ‘जेब्रा क्रॉसिंग’ कहते हैं। इसके ऊपर से पैदल यात्री सड़क पार करते हैं।

प्रश्न 5.
‘सड़क की भाषा का ज्ञान’ से आप क्या समझते हैं? अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर:
‘सड़क की भाषा’ से आशय यातायात के नियमों का ज्ञान होने से है। सड़क पर अनेक संकेतक चिहन बने होते हैं। हमें उनके बारे में जानकारी होनी चाहिए, तभी हम सुरक्षित यात्रा कर सकते हैं।

प्रश्न 6.
वाहनों में सीट बैल्ट क्यों आवश्यक है? क्या यह केवल वाहन चालक के लिए ही महत्वपूर्ण है या वाहन में सवार सभी व्यक्तियों के लिए?
उत्तर:
सीट बेल्ट दुर्घटना की स्थिति में वाहन चालक एवं सवारी को आगे की टक्कर होने से रोकती है। यह वाहन चालक व सवार सभी व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 7.
अगर किसी वाहन में आग लगी हुई दिखे तो आप किस संख्या पर डायल करेंगे?
उत्तर:
101 पर।

प्रश्न 8.
सड़क पर अगर कोई व्यक्ति घायल दिखे, तो आप किस संख्या पर डायल करेंगे?
उत्तर:
108 पर।

प्रश्न 9.
यदि आप किसी समस्या में फँसे हैं। आपको पुलिस की मदद चाहिए तो आपकौन सी संख्या पर डायल करेंगे? \
उत्तर:
100 पर।

प्रश्न 10.
यदि आप दुर्घटना स्थल पर हो तो आपको क्या करना चाहिए?
उत्तर:
हमें पुलिस और एंबुलेंस को सूचना देनी चाहिए तथा घायलों की प्राथमिक चिकित्सा करानी चाहिए।

प्रश्न 11.
ट्रैफिक लाइट पर खड़े रहकर इंजन न बन्द करने से क्या होता है?
उत्तर:
इंजन न बंद करने से ईंधन की खपत बढ़ती है तथा वायु प्रदूषण भी होता है।

प्रश्न 12.
गाड़ी चलाते समय आगे की गाड़ी से कितनी दूरी रखनी चाहिए?
उत्तर:
आगे की गाड़ी व अपनी गाड़ी के बीच एक गाड़ी की दूरी रखनी चाहिए।

प्रश्न 13.
गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन पर बातें क्यों नहीं करनी चाहिए?
उत्तर:
गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन पर बातें करने से चालक का ध्यान बातों की ओर चला जाता है। फलतः वाहन से नियंत्रण हटते ही दुर्घटना हो जाती है। अतः वाहन चलाते समय मोबाइल पर बातें नहीं करनी चाहिए।

प्रश्न 14.
सामने की गाड़ी से आगे जाने के लिए किस ओर से ओवरटेक करना चाहिए?
उत्तर:
सामने की गाड़ी को ओवरटेक दायीं ओर से करना चाहिए।

प्रश्न 15.
क्या आप जानते हैं कि सड़क चिह्न पूरी दुनिया में एक जैसे हैं?
उत्तर:
मुझे अपने दादाजी और विषय अध्यापक महोदय से यह जानकारी मिली कि सड़क चिह्न पूरी दुनिया में एक जैसे होते हैं। इनके द्वारा मुझे यह भी ज्ञात हुआ कि विभिन्न देशों में अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती हैं। ये भाषाएँ प्रायः वाहन चालकों को समझ में नहीं आती। दूसरे शब्दों में सड़क के नियमों को समझने में भाषाई विभिन्नता रुकावट बन जाती है। इसी कारण सड़क के नियमों को संकेत रूप में समझाने के लिए पूरे विश्व में सड़क चिह्न एक जैसे होते हैं।

प्रश्न 16.
किसी बीमार वृद्ध व्यक्ति की सहायता आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
किसी वृद्ध व्यक्ति के बीमार होने की सूचना जैसे ही हमें प्राप्त होगी, हम अपना सब काम छोड़कर सबसे पहले उनके घर जायेंगे। उनकी हालत देखकर उनको डॉक्टर को दिखाने के लिए तुरन्त किसी भी उपलब्ध साधन से ले जायेंगे और उनका इलाज करवाने में पूरा सहयोग सभी प्रकार से करेंगे।

प्रश्न 17.
पैदल यात्रा परिपथ को जेब्रा क्रासिंग क्यों कहते हैं ?
उत्तर:
पैदल यात्रा परिपथ को जेब्रा क्रासिंग इसलिए कहते हैं क्योंकि सड़क पर जिस जगह यह क्रासिंग होती है वहाँ वैसी ही क्षैतिज धारीदार पट्टियाँ बनी होती हैं जैसे जेब्रा पशु के शरीर पर बनी होती हैं। इस प्रकार जेब्रा क्रासिंग का आशय धारीदार पट्टियों से होता है।

प्रश्न 18.
राजस्थान में प्रचलित पर्दा-प्रथा व दहेज प्रथा पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
पर्दा प्रथा-प्राचीन भारतीय संस्कृति में हिन्दू समाज में पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था, लेकिन मध्यकाल में बाहरी आक्रमणकारियों की कुत्सित व लोलुप दृष्टि से बचाने के लिए यह प्रथा चल पड़ी, चारदीवारी में कैद होकर रह गई। राजपूत समाज में तो पर्दा प्रथा अत्यंत कठोर थी। मुस्लिम समाज में यह एक धार्मिक प्रथा है। 19वीं शताब्दी में कुछ सुधारकों ने इस प्रथा का विरोध किया, जिनमें स्वामी दयानन्द सरस्वती प्रमुख थे।

पर्दा प्रथा दूर करने हेतु उन्होंने स्त्री शिक्षा पर बल दिया। दहेज प्रथा-दहेज वह धन या सम्पत्ति होती है जो विवाह के अवसर पर वधू पक्ष द्वारा विवाह की आवश्यक शर्त के रूप में वर पक्ष को दी जाती है। वर्तमान में इस प्रथा ने विकराल रूप धारण कर लिया है। इसने लड़कियों के विवाह को अति दुष्कर कार्य बना दिया है। सन् 1961 में भारत सरकार द्वारा दहेज निरोधक अधिनियम भी पारित कर लागू कर दिया गया, लेकिन इस समस्या का अभी तक कोई ठोस निराकरण नहीं हो सका है।

प्रश्न 19.
उन उपायों के बारे में पता लगाइए जिनका प्रयोग कर सड़क पर वाहन गति को कम किया जाता है और क्या ऐसा करना आवश्यक है?
उत्तर:

  1. सड़क संकेतक लगाए जाएँ जिनमें गति सीमा दर्शायी गयी हो।
  2. स्कूल, कालेज, अस्पताल, राजकीय कार्यालयों के पास स्पीड ब्रेकर लगे हों।
  3. ट्रैफिक पुलिस द्वारा निगरानी रखी जाए।
  4. नागरिकों को सड़क सुरक्षा के विषय में पूर्ण जानकारी हो।
  5. राजमार्गों और एक्सप्रेस वे पर गति सीमा के लिए विशेष निर्देश हों।

प्रश्न 20.
विधवा विवाह का विरोध करने वालों को आप किस प्रकार रोकेंगे?
उत्तर:
विधवा विवाह का विरोध करने वाले लोगों को हम समझायेंगे कि इस में कोई बुराई नहीं है। जिस विधवा लड़की का विवाह हो रहा है, उसकी पूरी जिन्दगी उसके सामने पड़ी है, वह छोटी अवस्था में ही विधवा हो गयी है। वह अपना शेष जीवन किसके सहारे काटेगी। उसकी भी तो अपनी इच्छाएँ हैं। इस बात पर हम लोगों को विचार करना चाहिए। इस प्रकार लोगों को विरोध न करने के लिए समझाऊँगा।

प्रश्न 21.
सड़क पर बच्चों द्वारा पालन किए जाने वाले 4 सूत्र लिखिए।
उत्तर:

  1. सड़क को खेल के मैदान के रूप में प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  2. बच्चों को न तो सड़क पर दौड़ना चाहिए और न ही दौड़ने की होड़ करनी चाहिए।
  3. आवश्यकता होने पर यदि सड़क पर मुड़ना हो तो मुड़ने की दिशा में अपने हाथ द्वारा संकेत करना चाहिए।
  4. साइकिल नंगे पैर अथवा चप्पल पहनकर नहीं चलानी चाहिए बल्कि अच्छे किस्म का जूता पहनकर ही साइकिल चलानी चाहिए।

प्रश्न 22.
हरे पेड़ काटने से जीवों पर क्या प्रभाव पड़ता है? हरे पेड़ों को काटने से रोकने हेतु अपने सुझाव दीजिए।
उत्तर:
जीव-जगत के लिए पेड़ प्रकृति की अमूल्य देन हैं। हरे पेड़ों को काटने से जीवों पर अनेक दुष्प्रभाव पड़ते हैं। पेड़ नाना प्रकार के जीवों की शरणस्थली व आवास होते हैं। पेड़ों के कटने से अनेक जीव आवासहीन हो जाते हैं। भोजन व आवास से रहित होकर अनेक पशु-पक्षी मर जाते हैं। जिससे जैव विविधता नष्ट होने का भयानक संकट उत्पन्न हो जाता है।

पर्यावरण संतुलन व पारिस्थितिकी चक्र गड़बड़ा जाता है। हरे पेड़ों को काटने से रोकने हेतु सामूहिक चेतना जगानी होगी। लोगों को पेड़ कटने से होने वाले बुरे प्रभावों के बारे में जानकारी देनी होगी। पेड़ों की सुरक्षा के लिए बने कानूनों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। साथ ही वन महोत्सव व वृक्षारोपण जैसे अभियान चलाकर लोगों को नए पेड़ लगाने, पेड़ों की सुरक्षा व देखभाल करने के लिए जागरूक करना चाहिए।

प्रश्न 23.
स्वच्छ भारत योजना में आप अपना योगदान किस प्रकार दे सकते हैं?
उत्तर:
गाँधी जयन्ती के अवसर पर हमारे देश के प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत योजना का अभियान प्रारंभ किया था। इस अभियान में योगदान करने के लिए हम सभी को सफाई के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। इसके लिए हमें अपनी आदतें भी बदलनी होंगी। हमें सड़क पर थूकना, कूड़ा-कचरा फेंक देना, खुले में मल-मूत्र त्याग करना- जैसी आदतों को तुरंत छोड़ना होगा।

अपने आस-पास की सड़कों, गलियों, नदियों, तालाबों, घरों और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ बनाने के लिए हम सब सामूहिक रूप से प्रयास करेंगे। सार्वजनिक स्वच्छता व व्यक्तिगत स्वच्छता के लिए हम अपना पूरा योगदान देंगे। साथ ही अपने साथियों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। स्वच्छ भारत अभियान की सफलता केवल कानून बनाकर या सरकारी प्रयासों से नहीं हो सकती। इसके लिए हमें भी व्यक्तिगत प्रयास करने की आवश्यकता है।

प्रश्न 24.
घर से विद्यालय एवं विद्यालय से घर पहुँचने के सुरक्षित रास्ते की योजना बनाएँ।
उत्तर:
मेरी दृष्टि में घर से विद्यालय एवं विद्यालय से घर पहुँचने के सुरक्षित रास्ते की योजना बिन्दुवार निम्नलिखित हो सकती है –
(क) सड़क पर सदैव बायीं ओर से चलना चाहिए।
(ख) वाहनों से सदैव एक निश्चित दूरी बनाए रखनी चाहिए।
(ग) पीछे से यदि कोई वाहन आ रहा हो तो फुटपाथ पर होकर चलना चाहिए।
(घ) सड़क के संकेत चिहनों एवं संकेतों के बारे में जानकारी रखकर उनका सावधानीपूर्वक पालन करना चाहिए।
(ङ) पैदल होने पर सड़क को जेब्रा क्रासिंग से ही पार करना चाहिए।

प्रश्न 25.
कॉलोनी में गन्दगी फैलाने वालों को रोकने के लिए आप उन्हें किस प्रकार समझायेंगे।
उत्तर:
कॉलोनी के कुछ लोग जगह-जगह कचरा एवं गन्दगी फैलाते रहते हैं। इससे न केवल परी कॉलोनी गन्दी नजर आती है बल्कि अनेक प्रकार की बीमारियाँ भी फैलती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी परे देश में स्वच्छ भारत अभियान चला रहे हैं। हम अपनी कॉलोनी के लोगों को समझायेंगे कि सभी लोग अपने घरों से निकलने वाले कूड़े-कचरे को इधर-उधर न डालकर कूड़ेदान में व एक नियत स्थान पर ही डालें। जिससे पूरी कॉलोनी साफ-सुथरी नजर आये और हम स्वच्छ भारत अभियान में भी अपना योगदान दे सकें।

प्रश्न 26.
विद्यालय जाते समय घर वापिस आते समय सड़क के कौन-कौनसे चिह्नों को आपदेखते हैं ?
उत्तर:
विद्यालय जाते समय और घर वापिस आते समय सड़क के जिन चिह्नों को देखते हैं उनमें से कुछ के अर्थ निम्न हैं –

  1. आगे मोड़ है।
  2. प्रवेश निषेध।
  3. हॉर्न प्रतिबंधित।
  4. आगे विद्यालय है।
  5. पैदल यात्रा प्रतिबंधित है।
  6. गति अवरोधक।
  7. गति सीमा।
  8.  यू-टर्न निषेध
  9. ओवरटेक निषेध।

प्रश्न 27.
मृत्यु भोज एक कुरीति है। आप उसे रोकने के लिए क्या प्रयास करेंगे?
उत्तर:
हमारे यहाँ मृत्यु भोज करना एक सामाजिक कुरीति है, इसलिए इस सामाजिक बुराई को हमें आज के महँगाई के जमाने में छोड़ देना चाहिए। मृत्यु भोज की जगह गरीबों और वृद्धों के लिए चलने वाली संस्थाओं में दान दे देना चाहिए। हम इस कुरीति को रोकने के लिए रैलियाँ निकाल कर, लोगों से संकल्प पत्र लिखवाकर आदि अभियान चलाकर इस कुप्रथा को खत्म करने का प्रयास करेंगे।

प्रश्न 28.
आपको यातायात के किन-किन नियमों का पालन करना चाहिए?
उत्तर:
हमें यातायात के निम्नलिखित नियमों का पालन करना चाहिए –

  1. हमें सदैव सड़क पर बायीं ओर से ही चलना चाहिए।
  2. पैदल चलने की दशा में सड़क हमेशा जेब्रा क्रासिंग से ही पार करनी चाहिए।
  3. सड़क संकेतों एवं चिह्नों को देखकर उनके द्वारा दिए गए सांकेतिक निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन करना चाहिए।
  4. दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट अवश्य लगाना चाहिए।
  5. चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट अवश्य बाँधनी चाहिए। वाहनों को निश्चित किए गए स्थान पर ही पार्क (खड़ा) करना चाहिए।

प्रश्न 29.
कुछ लोग कन्या शिक्षा का विरोध कर रहे हैं। आप उन्हें किस प्रकार रोकेंगे?
उत्तर:
हम बालिका शिक्षा का विरोध करने वालों को समझायेंगे कि आज के जमाने में बेटा-बेटी एक समान हैं। यदि बेटे को पढ़ने का अधिकार है तो बेटियों को क्यों नहीं। फिर पढ़ी-लिखी बेटी अपने परिवार-समाज की एक तरह से धरोहर होती है। वह समाज और परिवार को आगे बढ़ाती है। वह अपनी संतान को पढ़ाने-लिखाने में अपनी अहम भूमिका निभाती है। उनके भविष्य का निर्माण करने में सहायक होती है। अपनी गृहस्थी का संचालन करने में सहायक होती है। आदि बातें उन्हें समझायेंगे।

प्रश्न 30.
सड़क पार करते समय किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर:
सड़क पार करते समय हमें सर्वप्रथम दाएँ-बाएँ यह देखना चाहिए कि कहीं कोई वाहन तो नहीं आ रहा है। इसके बाद सड़क के विभिन्न संकेत चिह्नों को देखकर सावधानीपूर्वक सड़क पार करनी चाहिए। पैदल होने पर जेब्रा क्रासिंग से ही सड़क पार करनी चाहिए।

प्रश्न 31.
आपके विद्यालय में कुछ छात्र नल को खुला छोड़ देते हैं, जिससे जल का दुरुपयोग होता है। आप उन्हें किस प्रकार समझायेंगे?
उत्तर:
विद्यालय में जल का दुरुपयोग करने वाले छात्रों को समझायेंगे कि हमें जल का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि जल ही जीवन है। जल का सदुपयोग करना चाहिए। टंकी के नलों को खुला छोड़कर उसे व्यर्थ में फैलाना नहीं चाहिए, क्योंकि कल पानी नहीं रहेगा तो हमारा जीवन संकट में पड़ जायेगा। हमारे दैनिक कार्य नहीं हो सकेंगे।

प्रश्न 32.
सड़क पर पालन किए जाने वाले बिन्दु व सावधानियों के बारे में बताइए।
उत्तर:

  1. जब हम पैदल हों तो ध्यानपूर्वक चलना चाहिए। सामने से आ रहे यातायात पर नजर रखनी चाहिए। जहाँ ड्राइवर नहीं देख पाए वहाँ सड़क पार करने से बचना चाहिए।
  2. डिवाइडर अथवा रेलिंग्स के ऊपर से कभी नहीं कूदना चाहिए।
  3. यदि हम साइकिल से यात्रा कर रहे हों तो साइकिल पर क्षमता से अधिक भार नहीं लादना चाहिए। यदि सड़क पर साइकिल मार्ग हो तो केवल उसका ही उपयोग करना चाहिए अथवा हमेशा बायीं ओर से चलना चाहिए।
  4. सड़क पर मुड़ते समय यातायात पर दृष्टि डालनी चाहिए एवं हाथ से मुड़ने वाली दिशा में संकेत करना चाहिए।
  5. यदि हम बस से विद्यालय जा रहे हों तो शरीर का कोई भी अंग खिड़की आदि से बाहर नहीं निकालना चाहिए शोरगुल कदापि नहीं करना चाहिए। इससे चालक का ध्यान बँटता है अतः दुर्घटना की सम्भावना बढ़ जाती है।

प्रश्न 33.
खुला शौचमुक्त गाँव से आप क्या समझते हो? इस अभियान में हमारा क्या योगदान हो सकता है? लिखिए।
उत्तर:
‘खुला शौचमुक्त’ से आशय है-खुले में शौच क्रिया से मुक्त होना’। ऐसा गाँव जहाँ लोग बाहर खेतों या जंगलों में शौच के लिए न जाते हों, घरों में ही शौचालय हों, ‘खुला शौच’ मुक्त गाँव कहा जाता है। आज की परिस्थितियों में खुले में शौच रोगों को खुला आमंत्रण बन गया है। साथ ही इससे उत्पन्न महिलाओं की असुरक्षा ने इसे विकट समस्या बना दिया है। अतः इस परंपरा का यथाशीघ्र समाधान स्वच्छता, स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा की दृष्टि से बहुत आवश्यक हो गया है।

इस दिशा में किये जा रहे प्रयास सार्थक भी हो रहे हैं। इस अभियान में हम सभी का योगदान आवश्यक है। लोगों को खुले में शौच से होने वाली हानियों के बारे में समझाना चाहिए। अपने घरों में छात्र-छात्राएँ अपने माता-पिता आदि को इससे छुटकारा पाने के लिए प्रेरित करेंगे। छात्र-छात्राएँ शिक्षकों के मार्गदर्शन में रैली आदि निकालकर जन-जागरण का प्रयास करेंगे। इस प्रकार सभी के सामूहिक प्रयास से इस बुराई को समाप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 34.
‘नमामि गंगे’ या नदी जल स्वच्छता अभियान के बारे में आप क्या जानते हो? लिखिए।
उत्तर:
नदियाँ हमारे देश रूपी शरीर की रक्त शिराएँ हैं। दुर्भाग्य से नदी-जल के प्रदूषण से नदियों की उपयोगिता और अस्तित्व संकट में पड़ गए हैं। नगरों का मल-मूत्र, कूड़ा-करकट, गंदा पानी और धार्मिक कृत्यों का अपशिष्ट नदियों में बहाया जा रहा है। नदियाँ आज गंदे नाले का रूप लेती जा रही हैं। देश को स्वच्छ, स्वस्थ और संपन्न बनाने के लिए ‘नदी-जल स्वच्छता अभियान’ से जुड़ना हम सभी का कर्तव्य है।

सरकार ने ‘नमामि गंगे’ नाम से गंगा स्वच्छता अथवा नदी-जल स्वच्छता अभियान का आरंभ किया है। केवल सरकारी अभियान से नदियाँ स्वच्छ नहीं हो सकी। हर वर्ग के नागरिकों को इसे एक राष्ट्रीय आन्दोलन के रूप में अपनाना होगा। कुछ स्वैच्छिक संस्थाएँ भी इस अभियान में भाग ले रही हैं। छात्र भी रैलियों तथा स्वच्छीकरण कार्यक्रमों द्वारा इस अभियान में भागीदारी निभा सकते हैं।

प्रश्न 35.
आपके गाँव में बाल-विवाह हो रहा है। आप उसे किस प्रकार रुकवाएँगे?
उत्तर:
राजस्थान में छोटी उम्र में ही विवाह कर देने की कुप्रथा है। प्रतिवर्ष अक्षय तृतीया पर सैकड़ों बच्चे विवाह बंधन में बाँध दिए जाते हैं। हालाँकि सरकार द्वारा इसके विरुद्ध अधिनियम बनाकर कानून लागू कर दिया गया है एवं बाल विवाह को दण्डनीय करार दिया गया है, किंतु आज भी चोरी-छिपे बाल-विवाह.हो रहे हैं। अगर मेरे गाँव में बाल विवाह हो रहा होगा तो मैं इसे रोकने के लिए आस-पास के सम्भ्रांत और शिक्षित लोगों को इकट्ठा करके दोनों पक्षों को समझाकर इस विवाह को न करने के लिए उनको समझाऊँगा, न मानने की स्थिति में मैं पुलिस को सूचना दूंगा। हर हाल में मैं बाल-विवाह को रुकवाकर ही मानूँगा।

प्रश्न 36.
सड़कपर पाए जाने वाले तीन त्रिभुजाकार चिह्नों का चित्रांकन एवं उनके बारे में लिखें।
उत्तर:
RBSE Class 8 Hindi रचना सड़क सुरक्षा एवं परिवेशीय सजगता - 1

प्रश्न 37.
सड़क सुरक्षा तथा यातायात के चिह्नों को पहचानने का अभ्यास करें।
उत्तर:
सड़क के किनारे लगे बोर्डों पर यातायात के विभिन्न चिहन और संकेत बने होते हैं। उनमें से कुछ प्रमुख चिह्न यहाँ दिए जा रहे हैं।
RBSE Class 8 Hindi रचना सड़क सुरक्षा एवं परिवेशीय सजगता - 2

प्रश्न 38.
राजस्थानी महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले पारंपरिक पहनावे का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान में महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले परिधान निम्नलिखित हैं –
(क) कुर्ती और काँचली – शरीर के ऊपरी हिस्से में पहना जाने वाला वस्त्र।
(ख) घाघरा – कमर के नीचे एडी तक पहने जाने वाला घेरदार वस्त्र, जो कई कलियों को जोड़कर बनाया जाता है।
(ग) ओढ़नी, लूगड़ी या साड़ी – कुर्ती, काँचली तथा घाघरे के ऊपर शरीर पर पहना जाने वाला वस्त्र। पोमचा, लहरिया, चुनरी, मोठड़ा, धनक आदि कुछ विशिष्ट लोकप्रिय ओढ़नियाँ हैं। लहरिया श्रावण मास में तीज पर विशेष रूप से पहना जाता है। लहरिये की धारियाँ जब एक-दूसरे को काटती हुई बनाई जाती हैं तो वह मोठड़ा कहलाता है।

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