RBSE Class 8 Hindi रचना अपठित गद्यांश

Rajasthan Board RBSE Class 8 Hindi रचना अपठित गद्यांश

RBSE Solutions for Class 8 Hindi

निर्देश-निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर उनके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
प्रश्न  1.
देश-प्रेम का भाव एक पावन भाव है। इस पवित्र भाव से पूर्ण मानव का जीवन आदर्श और अनुकरणीय होता है। देशप्रेमी व्यक्ति सदा अपने देश का हित सोचता है। वह उसे विश्व का शिरोमणि बना देना चाहता है। वह मनसा, वाचा, कर्मणा ऐसा व्यवहार करता है, जिससे देश गौरवान्वित हो। उसे हर समय देश-हित की ही चिंता रहती है । ऐसा देश-प्रेम मानव को संकीर्ण धरातल से ऊपर उठाता है।
(1) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(2) देश-प्रेमी मानव का जीवन आदर्श व अनुकरणीय क्यों है ?
(3) उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
उत्तर:
(1) शीर्षक : ‘देश-प्रेम’।
(2) देश-प्रेम पवित्र भाव है, इस भाव से पूर्ण मानव का जीवन आदर्श और अनुकरणीय होता है।
(3) देश-प्रेम पवित्र भाव है। देश-प्रेमी सर्वदा अपने देश के हित में ही सोचता है। वह मन, वाणी व कर्म से अपने देश को सर्वश्रेष्ठ बना देना चाहता है। देश-प्रेम से मानव संकीर्णता की भावनाओं से ऊपर उठता है।

RBSE Class 8 Hindi अपठित गद्यांश

प्रश्न  2.
भारतीय नारी त्याग, बलिदान, साहस, शक्ति तथा सेवा की सजीव मूर्ति है। जीवन के सुख-दुःख में छाया की भाँति पुरुष का साथ देने के कारण वह अर्धांगिनी, घर की व्यवस्थापिका होने के कारण लक्ष्मी और प्रशंसनीय गुणों के कारण वह देवी कही जाती है। स्वार्थ और भोगलिप्सा को तिलांजलि देकर भारतीय नारी ने आत्मबलिदान के द्वारा समय-समय पर ऐसी ज्योति प्रज्वलित की है कि जिसके प्रकाश में पुरुष ने अपना मार्ग ढूँढ़ा है। उसकी शक्ति के आगे तो यमराज को भी हारना पड़ा। नारी का सम्मान करके ही पुरुष का जीवन आनंद से भर जाता है । भारतीय संस्कृति के अनुसार जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं।
(1) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(2) नारी के विभिन्न रूप किन गुणों के कारण हैं ?
(3) उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
उत्तर:
(1) शीर्षक : ‘भारतीय नारी’।
(2) छाया की भाँति सुख-दुःख में साथ देने के कारण वह अर्धांगिनी घर की व्यवस्थापिका होने के कारण लक्ष्मी तथा प्रशंसनीय गुणों के कारण देवी कही जाती है।
(3) भारतीय नारी, अपने विभिन्न गुणों के कारण अर्धांगिनी, लक्ष्मी, देवी, शक्ति एवं सेवा की प्रतिमूर्ति है। अतः नारी के सम्मान में ही मानवता का उत्थान निहित है।

प्रश्न  3.
मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है। उसके जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिए ? केवल खाना, पीना और सोना अथवा कोई विशेष काम करना ? यदि मनुष्य का उद्देश्य केवल खाना, पीना और सोना ही हो तो वह व्यक्ति शारीरिक मौत के साथ ही मर जाता है अर्थात् दुनिया उसे भूल जाती है । ऐसे व्यक्ति पर आने वाली पीढ़ियाँ अभिमान नहीं कर सकी । इतिहास में उसी व्यक्ति का नाम अमर रहेगा, जिसने अपने जीवन में विशेष काम किए हों, जो स्वदेश के लिए अपनी जान कुर्बान करते हों । ऐसे लोगों का नाम ही संसार में अमर रहता है । हमें ऐसे वीरों एवं महापुरुषों को अपना आदर्श बनाना चाहिए ताकि मृत्यु के बाद भी लोग याद रखें।
(1) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(2) इतिहास में कैसे व्यक्ति का नाम अमर रहता है?
(3) उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
उत्तर:
(1) शीर्षक- जीवन-लक्ष्य।
(2) इतिहास में उसी व्यक्ति का नाम अमर रहता है जिसने अपने जीवन में विशेष कार्य किये हों।
(3) मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है। उसके जीवन का लक्ष्य सिर्फ खाना, पीना, सोना न होकर अपने जीवन में विशेष काम करना होना चाहिए। जो लोग अपने जीवन में विशेष कार्य करते हैं, संसार में उन्हीं का नाम अमर रहता है। अतः ऐसे महापुरुषों को अपना आदर्श बनाना चाहिए।

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प्रश्न  4.
चरित्र-निर्माण जीवन की सफलता की कुंजी है। जो मनुष्य अपने चरित्र की ओर ध्यान देता है, वही जीवन-क्षेत्र में विजयी होता है। चरित्र-निर्माण से मनुष्य के भीतर एक ऐसी शक्ति जाग्रत होती है, जो उसे जीवन संघर्ष में विजयी बनाती है। ऐसा व्यक्ति जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। वह जहाँ कहीं भी जाता है, अपने चरित्र की शक्ति से अपना प्रभाव स्थापित कर लेता है। वह सहस्रों और लाखों के बीच में भी अपना अस्तित्व रखता है। उसे देखते ही लोग उसके व्यक्तित्व के सम्मुख अपना मस्तक झुका लेते हैं। उसके व्यक्तित्व में सूर्य का तेज और आँधी की गति होती है।
(1) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
(2) चरित्र-निर्माण से मनुष्य में कैसी शक्ति जाग्रत होती है?
(3) उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
उत्तर:
(1) शीर्षक : ‘चरित्र-निर्माण’।
(2) चरित्र-निर्माण से मनुष्य में जीवन संघर्ष में विजयी बनने की शक्ति जाग्रत होती है।
(3) मनुष्य अपने चरित्र से ही अपने जीवन के संघर्षों का सामना करके सफलता प्राप्त करता है। चरित्र से ही वह अपना प्रभाव समाज तथा राष्ट्र में स्थापित कर पाता है। चरित्रवान व्यक्ति के तेज के आगे सभी नतमस्तक हो जाते हैं।

प्रश्न  5.
सद्ग्रंथ मानव-जीवन की अमूल्य निधि हैं। इस निधि की समता में समाज के पास अन्य कोई संपत्ति नहीं है। मानव अपने जीवन के लिए जो कुछ भी उत्तम की प्राप्ति करता है, उसमें सद्ग्रंथों का ही विशेष योगदान है। उत्तम ग्रंथ पुस्तकालय की शोभा यात्रा ही नहीं, वरन मानवीय गुणों के विकास में ये प्रमुख भूमिका निभाते हैं। आप किसी भी विषय की अच्छी पुस्तक लीजिए, वह आपकी ज्ञान-वृद्धि करेगी और आपकी चिर-पिपासा शांत करेगी। जीवन के ऊँचे आदर्शों की स्थापना भी ये ग्रंथ-रत्न करते हैं। सत्यम्, शिवम् और सुंदरम् की त्रिवेणी का स्रोत इन्हीं ग्रंथों में है। ये ग्रंथ मानव-जीवन के सच्चे साथी और एकमात्र हितैषी हैं । मानव एक-दूसरे को धोखा दे सकते हैं, किंतु एक अच्छा ग्रंथ सर्वोच्च सुख की अनुभूति प्रदान करता है।
(1) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(2) उत्तम ग्रंथ क्या करते हैं ?
(3) उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
उत्तर:
(1) शीर्षक : ‘उत्तम ग्रंथों का मूल्य’।
(2) उत्तम ग्रंथ मानवीय गुणों का विकास करते हैं।
(3) उत्तम ग्रंथ सबसे मूल्यवान होते हैं। ये हमें ज्ञान प्रदान करने के अतिरिक्त हमारे मानवीय गुणों का विकास करते हैं। जीवन के उच्च आदर्शों की स्थापना भी इनके द्वारा ही होती है । ये मानव के सच्चे मित्र हैं

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प्रश्न  6.
राजस्थान की धरती ने भारत की वीर-माला के लिए जो बहुमूल्य रत्न प्रदान किए हैं, उनमें महाराणा प्रताप को सुमेरु मणि कहा जाय तो अतिशयोक्ति न होगी। वीरता का मापदंड क्या केवल युद्ध में विजयी होना है ? नहीं, वीरता तो एक अदम्य वीरभाव है, निरंतर चुनौतियों से जूझने का उत्साह है, स्वाभिमान के साथ सिर उठाकर जीने का दृढ़ संकल्प है । वीरता तो कठिन परीक्षाओं में धैर्य और साहस के साथ जीने की अनुकरणीय जीवन-शैली है।

उपर्युक्त कसौटियों पर कसे जाने पर महाराणा प्रताप विशुद्ध कुंदन प्रमाणित होते हैं। वह स्वाभिमान का सौदा करने के बजाय शक्तिशाली शत्रु को रणभूमि में ललकारते हैं। पराधीनता से कलंकित राजवैभव को भोगने की अपेक्षा वह वन-वन भटकना, भूखे रहना और प्राण-प्रिय पुत्री का बिछोह स्वीकार करते हैं। राणा तो स्वयं वीरता के मानदंड हैं तथा स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्श हैं।

(1) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।
(2) वीरता क्या है ?
(3) उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।

उत्तर:
(1) शीर्षक : ‘वीरता का मूल्य’।
(2) वीरता का तात्पर्य युद्ध में विजय पाना ही नहीं है अपितु यह तो स्वाभिमान के साथ सिर उठाकर जीने का संकल्प है।
(3) राजस्थान ने अनेक वीर पुरुषों को जन्म दिया है। उनमें राणा प्रताप का नाम सर्वोच्च शिखर पर है। वह वीरता की प्रतिमूर्ति थे। कलंकित पराधीनता की अपेक्षा स्वतंत्रता के लिए उन्होंने असहनीय दुःख सहना स्वीकार किया।

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प्रश्न  7.
वृक्षों अथवा वनों से मानव को अनेक लाभ होते हैं। विज्ञान ने परीक्षण से सिद्ध कर दिया है कि वृक्ष सूर्य के प्रकाश में अत्यधिक मात्रा में ऑक्सीजन निकालते हैं तथा वायुमंडल में उसे विकीर्ण करते हैं, जो मानव को श्वास लेने में सहायक होकर उसके रक्त को शुद्ध करके उसे स्वस्थ बनाती है। वृक्ष को वर्षाकारक की संज्ञा दी गयी है। भूगोल तथा विज्ञान में बतलाते हैं कि वृक्षों की सघन श्यामल पत्तियों में मेघों को आकृष्ट करने की शक्ति है, साथ ही वे भूमिक्षरण को रोकने में भी सहायक होते हैं। हमें न केवल इनको नष्ट होने से बचाना चाहिए वरन् अधिकाधिक पेड़ लगाकर इन्हें बढ़ाना भी चाहिए।
(1) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(2) वनों की सुरक्षा कैसे होगी ?
(3) उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
उत्तर:
(1) शीर्षक : ‘वृक्षों का महत्व’।
(2) वनों को नष्ट होने से बचाना चाहिए तथा अधिकाधिक पेड़ लगाकर वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए।
(3) वृक्ष सूर्य के प्रकाश में ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जो मनुष्य को स्वस्थ बनाने में सहायक होती है। वृक्ष वर्षा को आकृष्ट करते हैं तथा भूमिक्षरण को रोकते हैं। अतः अधिक से अधिक वृक्षारोपण किया जाना चाहिए।

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