RBSE Class 12 Political Science Important Questions Chapter 3 समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व

Rajasthan Board RBSE Class 12 Political Science Important Questions Chapter 3 समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व Important Questions and Answers.

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RBSE Class 12 Political Science Important Questions Chapter 3 समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व

वस्तुनिष्ठ प्रश्न: 

प्रश्न 1. 
प्रथम खाड़ी युद्ध को किस सैन्य अभियान के नाम से जाना जाता है? 
(अ) ऑपरेशन डेजर्ट स्टार्म
(ब) ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम 
(स) ऑपरेशन इराकी फ्रीडम
(द) ऑपरेशन ब्लू स्टार। 
उत्तर:
(अ) ऑपरेशन डेजर्ट स्टार्म

RBSE Class 12 Political Science Important Questions Chapter 3 समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व 

प्रश्न 2. 
न्यूयार्क (अमेरिका) स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पर आतंकी हमला हुआ था।
(अ) 11 सितम्बर, 1991 को
(ब) 1 दिसम्बर, 2000 को 
(स.) 11 सितम्बर, 2001 को
(द) 11 सितम्बर, 2003 को। 
उत्तर:
(स.) 11 सितम्बर, 2001 को

प्रश्न  3. 
निम्नलिखित में से कौन - सा अमेरिका द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध इसके वैश्विक युद्ध का हिस्सा था?
(अ) ऑपरेशन डेजर्ट स्टार्म।
(ब) कम्प्यूटर वार 
(स) ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम
(द) वीडियो गेम वार। 
उत्तर:
(स) ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम

प्रश्न  4. 
संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ऑपरेशन इराकी फ्रीडम कूट नाम से इराक पर सैन्य हमला किया गया था। 
(अ) 11 सितम्बर, 2002 को
(ब) 19 मार्च, 2003 को 
(स) 1 अप्रैल, 2004 को
(द) 17 अगस्त, 2005 को। 
उत्तर:
(ब) 19 मार्च, 2003 को 

प्रश्न  5. 
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इराक पर अमेरिकी आक्रमण के सन्दर्भ में गलत है?
(अ) इस आक्रमण में से 40 से अधिक देश शामिल थे। 
(ब) संयुक्त राष्ट्र संघ ने इराक पर आक्रमण करने की अनुमति नहीं दी थी। 
(स) इराक पर आक्रमण इराक को सामूहिक संहार के हथियार बनाने से रोकना था।
(द) इस युद्ध में अमेरिका के 3000 सैनिक मारे गए। 
उत्तर:
(स) इराक पर आक्रमण इराक को सामूहिक संहार के हथियार बनाने से रोकना था।

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प्रश्न  6. 
हेगेमनी शब्द की जड़ें हैं। 
(अ) प्राचीन यूनान में
(ब) अमेरिका में 
(स) चीन में
(द) जापान में। 
उत्तर:
(स) चीन में

प्रश्न  7. 
विश्व के प्रथम बिजनेस स्कूल की स्थापना हुई थी। 
(अ) 1881 में
(ब) 1900 में 
(स) 1950 में
(द) 1962 में। 
उत्तर:
(स) 1950 में

प्रश्न  8. 
अमेरिकी वर्चस्व के अवरोधक के रूप में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है? 
(अ) रूस की बढ़ती हुई शक्ति
(ब) विश्व में फैला हुआ आतंकवाद. 
(स) अमेरिकी राज्य का अपना संस्थानिक ढाँचा 
(द) एक नई आर्थिक शक्ति के रूप में भारत का उदय।
उत्तर:
(ब) विश्व में फैला हुआ आतंकवाद. 

अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1. 
शीतयुद्ध की समाप्ति के पश्चात् विश्व का कौन - सा देश सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा? 
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका। 

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प्रश्न 2. 
शीतयुद्ध के पश्चात् विश्व व्यवस्था किस प्रकार की बनी हुई है? 
उत्तर:
एकध्रुवीय। 

प्रश्न 3. 
संयुक्त राज्य अमेरिका को अधिकतर किस नाम से जाना जाता है? 
उत्तर:
अमेरिका के नाम से। 

प्रश्न 4. 
अमेरिकी वर्चस्व का युग कब प्रारम्भ हुआ? 
उत्तर:
शीतयुद्ध की समाप्ति के पश्चात् (सन् 1991)।

प्रश्न 5. 
अमेरिका का वर्चस्व कब से प्रारम्भ हुआ ?
उत्तर:
अमेरिकी. वर्चस्व (एकध्रुवीयता) को हम सोवियत संघ के पतन के साथ जोड़कर देख सकते हैं। इस तरह वर्ष 1991 से ही अमेरिकी वर्चस्व की शुरूआत मानी जा सकती है।

प्रश्न 6. 
हाइवे ऑफ डैथ (मृत्यु का राजपथ) किस सड़क को कहा गया है? 
उत्तर:
कुवैत और बसरा के बीच की सड़क को हाइवे ऑफ डैथ (मृत्यु का राजपथ) कहा गया है। 

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प्रश्न 7. 
इराक ने कुवैत पर कब हमला किया? 
उत्तर:
अगस्त 1990 में। 

प्रश्न 8. 
कितने देशों की फौज ने ईराक के विरुद्ध मोर्चा खोला तथा उसे परास्त किया? 
उत्तर:
34 देशों की मिलीजुली 6,60,000 सैनिकों की फौज ने मोर्चा खोला और तथा उसे परास्त किया। 

प्रश्न 9. 
अमेरिका ने खाड़ी युद्ध में किन बमों का प्रयोग किया? 
उत्तर:
स्मार्ट बमों का। 

प्रश्न 10. 
किस युद्ध को कम्प्यूटर युद्ध के नाम से जाना जाता है? 
उत्तर:
प्रथम खाड़ी युद्ध को। 

प्रश्न 11. 
प्रथम खाड़ी युद्ध में किस देश को लाभ मिला? 
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका को। 

प्रश्न 12. 
बिल क्लिंटन ने किस नीति को चुनाव प्रचार का निशान बनाया? 
उत्तर:
घरेलू नीति को। 

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प्रश्न 13. 
'ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच' किस अमेरिकन राष्ट्रपति के आदेश से किया गया था ?
उत्तर:
विलियम जेफर्सन (बिल) क्लिंटन ने। 

प्रश्न 14. 
वाक्य को सार्थक बनाने के लिए इसे पूरा कीजिए
संयुक्त राष्ट्र द्वारा हमला करने की अनुमति न देने के बावजूद, राष्ट्रपति क्लिंटन ने "ऑपरेशन .........." का आदेश दिया।
उत्तर:
इनफाइनाइट रीच। 

प्रश्न 15. 
पेंटागन क्या है? 
उत्तर:
अमेरिकी रक्षा विभाग का मुख्यालय। 

प्रश्न 16. 
समकालीन विश्व राजनीति में 9/11' का प्रयोग किस घटना के लिए किया जाता है? 
उत्तर:
समकालीन विश्व राजनीति में 9/11' का प्रयोग संयुक्त राज्य अमेरिका में हुए आतंकवादी हमलों के लिए किया जाता है। 

प्रश्न 17. 
9/11 के हमले में कितने लोग मारे गये? 
उत्तर:
9/11 के हमले में लगभग 3,000 लोग मारे गये। 

प्रश्न 18. 
आतंकवाद के खिलाफ विश्वव्यापी युद्ध के तन्त्र के रूप में अमेरिका ने कौन-सा ऑपरेशन चलाया?
अथवा 
अमेरिका ने आतंकवाद के विरुद्ध कौन-सा अभियान चलाया?
उत्तर:
ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम।

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प्रश्न 19. 
संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा सन् 2003 में इराक पर किये गये हमले को किस सैन्य अभियान के नाम से जाना ....... जाता है? 
उत्तर:
'ऑपरेशन इराकी फ्रीडम'।

प्रश्न 20. 
'ऑपरेशन इराकी फ्रीडम' (इराकी मुक्ति अभियान) का क्या महत्त्व था?
उत्तर:
अमेरिका ने इस ऑपरेशन के जरिए इराक के तेल: भंडारों पर कब्जा किया तथा इराक में अपनी मनपसन्द सरकार कायम की। 

प्रश्न 21. 
'वर्चस्व' का क्या अर्थ है?
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में वर्चस्व का अर्थ है: शक्ति का केवल एक ही केन्द्र में होना। 

प्रश्न 22. 
विश्व राजनीति में अमेरिकी वर्चस्वों से क्या अभिप्राय है? 
उत्तर:
राजनीति, आर्थिक, सैनिक एवं सांस्कृतिक मामलों में अमेरिकी प्रभाव अथवा दबदबा। 

प्रश्न 23. 
अमेरिकी वर्चस्व के किन्हीं चार क्षेत्रों के नाम लिखिए। 
उत्तर:

  1. राजनीतिक क्षेत्र,
  2. सैन्य क्षेत्र,
  3. आर्थिक क्षेत्र,
  4. सांस्कृतिक क्षेत्र। 

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प्रश्न 24. 
हेगेमनी का क्या अर्थ है? 
उत्तर:
किसी एक राज्य का नेतृत्व अथवा वर्चस्व। 

प्रश्न 25. 
अमेरिका की मौजूदा ताकत की रीढ़ क्या है? 
उत्तर:
सैन्य शक्ति। 

प्रश्न 26.
दिए गए वाक्य को अर्थपूर्ण बनाने के लिए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिएइंटरनेट वैश्विक ............................ का एक उदाहरण है।
उत्तर:
सार्वजनिक, वस्तु। 

प्रश्न 27. 
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की किसी एक मुख्य विशेषता को उजागर कीजिए। 
उत्तर:
अमेरिकी अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। विश्व की अर्थव्यवस्था में अमेरिका की 21 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। 
प्रश्न 28. 
अमेरिका की संस्थागत ताकत का एक उदाहरण दीजिए। 
उत्तर:
मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एम.बी.ए.) की अकादमिक डिग्री। 

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प्रश्न 29. 
भारत तथा अमेरिका के बीच सम्बन्धों को दर्शाने वाले दो तथ्य बताइए। 
उत्तर:

  1. दोनों ही देश लोकतन्त्र के समर्थक हैं तथा 
  2. दोनों देश असैनिक प्रयोजनों के लिए परमाणु-शक्ति को बढ़ाने के पक्षधर हैं। 

प्रश्न 30. 
निकट भविष्य में सैन्य शक्ति के क्षेत्र में अमेरिका को कौन-कौन से देश चुनौती दे सकते हैं ?
उत्तर:

  1. भारत, 
  2. चीन, 
  3. रूस। 

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (SA1):

प्रश्न 1. 
एकध्रुवीय व्यवस्था से आप क्या समझते हैं? 
उत्तर:
शीतयुद्ध के दौरान विश्व में दो महाशक्तियाँ संयुक्त राज्य अमेरिका तथा सोवियत संघ थीं, लेकिन सोवियत संघ के पतन के पश्चात् दुनिया में सिर्फ एक ही महाशक्ति शेष बची। जब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी एक ही महाशक्ति का प्रभाव रहता है तो उसे एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था कहा जाता है।

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प्रश्न 2. 
नई विश्व व्यवस्था से क्या आशय है?
उत्तर:
समकालीन विश्व में एक नई विश्व व्यवस्था से यह आशय है कि वर्तमान में सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् विश्व के द्विध्रुवीय व्यवस्था समाप्त हो गयी है। उसके स्थान पर एकध्रुवीय व्यवस्था स्थापित हो गयी है। इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व की एकमात्र महाशक्ति के रूप में उभरा है।

प्रश्न 3. 
जार्ज बुश सीनियर ने किस व्यवस्था को नई विश्व व्यवस्था के नाम से सम्बोधित किया था?
उत्तर:
अगस्त 1990 में इराक ने कुवैत पर आक्रमण कर उस पर अपना नियन्त्रण स्थापित कर लिया। इराक का कुवैत से कब्जा हटाने के लिए राजनयिक स्तर पर की गयी समस्त कोशिशें बेकार साबित हुईं तो संयुक्त राष्ट्र संघ ने कुवैत को मुक्त कराने के लिए बल प्रयोग की अनुमति प्रदान कर दी। यद्यपि शीतयुद्ध के दौरान वह इस प्रकार के विषयों पर मौन हो जाता था। इसी व्यवस्था को जार्ज बुश सीनियर ने नई विश्व व्यवस्था के नाम से सम्बोधित किया।

प्रश्न 4. 
प्रथम खाड़ी युद्ध के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
अगस्त 1990 में इराक ने कुवैत पर हमला कर उस पर अपना नियन्त्रण स्थापित कर लिया। इराक के कुवैत पर से कब्जा न हटाने पर 34 देशों की मिली-जुली 6.60 लाख सैनिकों की फौज ने इराक पर हमला कर उसे परास्त किया। इसे प्रथम खाड़ी युद्ध के नाम से जाना जाता है। 

प्रश्न 5. 
'ऑपरेशन डेजर्ट स्टार्म' क्या है ?
अथवा 
'ऑपरेशन डेजर्ट स्टार्म' का प्रमुख उद्देश्य क्या था?
अथवा 
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में 34 देशों की मिली: जुली सेनाओं द्वारा सन् 1991 में कुवैत को मुक्त कराने के लिए इराक के विरुद्ध छेड़ा गया सैनिक अभियान 'ऑपरेशन डेजर्ट स्टार्म' कहलाता है। यह अभियान सफल रहा। 

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प्रश्न 6. 
प्रथम खाड़ी युद्ध को 'कम्प्यूटर युद्ध' क्यों कहा जाता है?
अथवा 
प्रथम खाड़ी युद्ध को वीडियो गेमवार' क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
प्रथम खाड़ी युद्ध में संयुक्त राज्य अमेरिका ने बहुत ही उच्च तकनीक के स्मार्ट बमों का प्रयोग किया। इसलिए इसे कुछ पर्यवेक्षकों ने 'कम्प्यूटर युद्ध' की संज्ञा दी। इस युद्ध कां विभिन्न देशों के टेलीविजन पर व्यापक प्रसार हुआ था इसलिए इसे वीडियो गेमवार' भी कहा जाता है।

प्रश्न 7. 
'ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच' क्या था?
उत्तर:
अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिटन ने 1998 में नैरोबी (केन्या) तथा दारे-सलाम (तंजानिया) में स्थित अपने दूतावासों पर आतंकवादी संगठन 'अलकायदा' द्वारा हमला करने के कारण सूडान व अफगानिस्तान स्थिति अलकायदा के ठिकानों पर कई बार क्रूज मिसाइलों से हमले करवाये। जिसे 'ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच' के नाम से जाना गया। 

प्रश्न 8. 
9/11 की घटना क्या थी? अमेरिका की इस पर क्या प्रतिक्रिया थी?
अथवा 
संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई नाइन इलेवन की घटना को संक्षेप में बताइए।
अथवा 
संयुक्त राज्य अमेरिका ने 9/11 के हमलों का जवाब कैसे दिया?
अथवा 
9/11 से सम्बन्धित घटना कौन - सी थी?
उत्तर:
11 सितम्बर, 2001 को संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयार्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर व वर्जीनिया स्थित अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन' पर जबरदस्त आतंकवादी हमला हुआ जिसमें लगभग 3000 लोग मारे गये। इस हमले में अलकायदा तथा तालिबान नामक आतंकवादी संगठनों के सम्मिलित होने की आशंका व्यक्त की गयी। परिणामस्वरूप अमेरिका ने आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध के रूप में 'ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम' प्रारम्भ कर दिया। इस अभियान का निशाना अलकायदा व अफगानिस्तान के तालिबान शासन को बनाया गया।

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प्रश्न 9. 
संयुक्त राज्य अमेरिका के सन्दर्भ में 9/11 का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
11 सितम्बर, 2001 को आतंकवादियों द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पेंटागन पर हमला किया गया। इस घटना - चक्र के पश्चात् अमेरिका एवं दूसरे अन्य देशों की सरकारें आतंकवाद पर अधिक ध्यान देने लगी। हालांकि आतंकवाद कोई नवीन परिघटना नहीं थी। पूर्व में आतंकवाद की अधिक घटनाएँ मध्य - पूर्व यूरोप, लातिनी अमेरिका तथा दक्षिण एशिया में हुई थीं। इस तिथि के बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ विश्वव्यापी अभियान छेड़ दिया।

प्रश्न 10. 
संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा छेड़े गये आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध में ऑपरेशन एन्यूरिंग फ्रीडम' का निशाना कौन था ?
अथवा 
'ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम' क्या था ?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा छेड़े गये आतंकवाद के लिए विश्वव्यापी युद्ध में ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम' का निशाना अलकायदा तथा अफगानिस्तान का तालिबान शासन था जिन्होंने 9/11 की घटना को अन्जाम दिया था। अतः संयुक्त राज्य अमेरिका ने इन्हें समाप्त करने के लिए ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम चलाया था। 

प्रश्न 11. 
स्तम्भ 'A' में दी गई घटनाओं को स्तम्भ 'B' में उनसे सम्बन्धित तिथियों से मिलान कीजिए।

(क) द्वितीय विश्वयुद्ध

(1) 1990

(ख) कुवैत पर आक्रमण

(2) 1992

(ग) बिल क्लिंटन का राष्ट्रपतित्व

(3) 1941

(घ) पर्ल हार्बर

(4) 1945

उत्तर:
(क) → (4), (ख) → (1), (ग) → (2), (घ) → (3)। 

प्रश्न 12. 
निम्नलिखित घटनाओं का उचित क्रम निर्धारित कीजिए।
(क) 'ऑपरेशन इराकी फ्रीडम' के अन्तर्गत संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा इराक पर आक्रमण। 
(ख) नैरोबी (केन्या) और तंजानिया में अमेरिकी दूतावातों पर बमों का फेंका जाना। 
(ग) वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर के उत्तरी तथा दक्षिणी टावरों पर हमला। 
(घ) इराक द्वारा कुवैत पर आक्रमण। 
उत्तर:
(घ), (ख), (ग), (क)। 

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प्रश्न 13. 
'ऑपरेशन इराकी फ्रीडम' क्या था?
उत्तर:
19 मार्च, 2003 को अमेरिकी अगुवाई वाले 'कॉअलिशन ऑफ वीलिंग्स' में 40 से अधिक देशों ने सम्मिलित होकर सामूहिक संहार के हथियार बनाने से रोकने के लिए इराक पर हमला किया; जिसे 'ऑपरेशन इराकी फ्रीडम' कहा गया।

प्रश्न 14. 
ऑपरेशन इराकी फ्रीडम के पीछे अमेरिका का असली मकसद क्या था?
अथवा
सन् 2003 में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा इराक पर आक्रमण के पीछे मूल उद्देश्य क्या थे? 
उत्तर:
सन् 2003 में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा इराक पर आक्रमण के पीछे मूल उद्देश्य निम्न थे।

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा इराक के तेल केन्द्रों पर नियन्त्रण स्थापित करना। 
  2. सद्दाम हुसैन के स्थान पर इराक में अपनी पसन्द की सरकार बनवाना। 

प्रश्न 15. 
संयुक्त राज्य अमेरिका के मौजूदा वर्चस्व का मुख्य आधार क्या है?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका के मौजूदा वर्चस्व का मुख्य आधार उसकी बढ़ी - चढ़ी सैन्य शक्ति है। आज कोई भी देश अमेरिकी सैन्य शक्ति का मुकाबला नहीं कर सकता। वह अपनी सैन्य क्षमता के बूते समस्त विश्व में कहीं भी निशाना साध सकता है। इसके सैन्य वर्चस्व का मुख्य आधार सैन्य व्यय के साथ-साथ उसकी गुणात्मक बढ़त भी है।

प्रश्न 16. 
साम्राज्यवादी शक्तियों ने सैन्य बल का प्रयोग किसके लिए किया है?
उत्तर:
साम्राज्यवादी शक्तियों ने सैन्य बल का प्रयोग महज चार लक्ष्यों - जीतने, अपरोध करने, दण्ड देने और कानून व्यवस्था को बहाल रखने के लिए किया है।

प्रश्न 17. 
ढाँचागत शक्ति के रूप में वर्चस्व से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी मर्जी चलाने वाला ऐसा देश जो अपने मतलब की वस्तुओं को बनाये रखता है तथा उसके पास इस व्यवस्था को बनाये रखने के लिए आवश्यक क्षमता व इच्छा होती है।

प्रश्न 18. 
वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक वस्तुओं से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक वस्तुओं से अभिप्राय ऐसी वस्तुओं से है, जिसका उपयोग प्रत्येक देश या प्रत्येक व्यक्ति समान रूप से कर सके। उस पर किसी भी प्रकार की रुकावट या कमी न आए। स्वच्छ वायु, जल, सड़क व समुद्री व्यापार आदि वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं के प्रमुख उदाहरण हैं।

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प्रश्न 19. 
अमेरिका की आर्थिक प्रबलता किस बात से जुड़ी हुई है?
उत्तर:
अमेरिका की आर्थिक प्रबलता उसकी ढाँचागत ताकत अर्थात् वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक विशेष आकार में ढालने की ताकत से जुड़ी हुई है। द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् अमेरिका द्वारा स्थापित ब्रेटनवुड प्रणाली आज भी विश्व की अर्थव्यवस्था की बुनियादी संरचना का कार्य कर रही है।

प्रश्न 20. 
संस्थागत बुनावट अमेरिकी शक्ति के रास्ते में अवरोध कैसे हैं ?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका की संस्थागत बुनावट अमेरिकी शक्ति के रास्ते में अवरोध का कार्य करती है। यहाँ शासन के तीन अंगों के बीच शक्ति का बँटवारा है और यही बुनावट कार्यपालिका द्वारा सैन्य शक्ति के उन्मुक्त प्रयोग पर अंकुश लगाने का कार्य करती है। 

प्रश्न 21. 
नाटो अमेरिकी वर्चस्व को कैसे सीमित कर सकता है?
उत्तर:
उत्तर अटलांटिक सन्धि संगठन (नाटो) वर्तमान काल में अमेरिकी वर्चस्व को सीमित कर सकता है क्योंकि अमेरिका के बहुत अधिक हित इस संगठन से जुड़े हुए हैं। नाटो में सम्मिलित अधिकांश देशों में बाजारमूलक (पूँजीवादी) अर्थव्यवस्था चलती है। इसी कारण इस बात की सम्भावना बनती है कि नाटो में सम्मिलित देश अमेरिका पर अंकुश लगा सकते हैं। 

प्रश्न 22. 
'बैंड्वैगन रणनीति' क्या थी?
अथवा 
"जैसी बहे बयार पीठ तैसी कीजै" की रणनीति से क्या आशय है?
उत्तर:
किसी देश को विश्व के सबसे शक्तिशाली देश के विरुद्ध रणनीति बनाने के स्थान पर उसके वर्चस्व तन्त्र में रहते हुए अवसरों का लाभ उठाने की रणनीति को ही बैंडवैगन अथवा "जैसी बहे बयार पीठ तैसी कीजै" की रणनीति कहते हैं। 

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प्रश्न 23. 
'अपने को छुपा लें' नीति से आप क्या समझते हैं?
अथवा 
वर्चस्व तंत्र में छुपने की रणनीति का क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
'अपने को छुपा लें' नीति का अर्थ होता है कि दबदबे वाले देश से यथासम्भव दूर-दूर रहना। चीन, रूस एवं यूरोपीय संघ विभिन्न तरीकों से अपने को अमेरिकी निगाहों में चढ़ने से बचाते रहे हैं। इस तरह अमेरिका के बेवजह क्रोध की चपेट में आने से ये देश अपने को बचाते हैं।

प्रश्न 24. 
भविष्य में अमेरिकी वर्चस्व को कौन-कौन से धरातल पर चुनौती मिलेगी और यह चुनौती कौन देगा?
उत्तर:
भविष्य में अमेरिकी वर्चस्व को आर्थिक एवं सांस्कृतिक धरातल पर चुनौती मिलने की सम्भावना है। यह चुनौती स्वयंसेवी संगठन, सामाजिक आन्दोलन एवं जनमत के आपसी मेल से प्राप्त होगी। मीडिया का एक वर्ग, बुद्धिजीवी, कलाकार एवं लेखक अमेरिकी वर्चस्व के प्रतिरोध में आगे आएँगे। 

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प्रश्न 25. 
फ्रांस तथा ब्रिटेन का वर्चस्व कब तक रहा?
उत्तर:
साढ़े तीन सौ साल गुजर जाने के बाद दो अवसर ऐसे आये जब किसी एक देश ने अन्तर्राष्ट्रीय फलक पर वही प्रबलता प्राप्त की जो आज अमेरिका को प्राप्त है, वह दो देश हैं।

  1. फ्रांस - यूरोप की राजनीति के सन्दर्भ में 1660 से 1713 तक। 
  2. ब्रिटेन - समुद्री व्यापार के बूते पर 1860 से 1910 तक।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (SA2):

प्रश्न 1. 
"प्रथम खाड़ी युद्ध ने यह प्रमाणित कर दिया कि दुनिया के शेष देश सैन्य शक्ति के दृष्टिकोण से संयुक्त राज्य अमेरिका से अभी काफी पिछड़े हुए हैं।" इस कथन को स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर:
इराक ने अगस्त 1990 में कुवैत पर हमला किया तथा उस पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। जब इराक को समझाने के लिए किए गए विभिन्न प्रयास विफल हो गए तब संयुक्त राष्ट्र संघ ने कुवैत को मुक्त कराने के लिए बल (शक्ति) प्रयुक्त किए जाने की अनुमति प्रदान कर दी। 34 देशों के संयुक्त छः लाख साठ हजार सैनिकों की विशाल सेना ने इराक के खिलाफ मोर्चा खोलकर उसे परास्त कर दिया। इसे प्रथम खाड़ी युद्ध कहा जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के इस सैन्य अभियान को 'ऑपरेशन डेजर्ट स्टार्म' कहा जाता है।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि इस सैन्य अभियान में 75 प्रतिशत सैनिक अमेरिका के थे। अमेरिकी जनरल नार्मन श्वार्जकॉव इस सैन्य अभियान के प्रमुख थे। हालांकि इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन का ऐलान था कि यह सौ जंगों की एक जंग साबित होगी। लेकिन इराकी सेना शीघ्र ही हार गई तथा उसे कुवैत से पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। प्रथम खाड़ी युद्ध से यह तथ्य भी प्रमाणित हो चुका है कि दुनिया के शेष देश सैन्य शक्ति के दृष्टिकोण से अमेरिका से अभी भी काफी पिछड़े हुए हैं।

RBSE Class 12 Political Science Important Questions Chapter 3 समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व

प्रश्न 2. 
संक्षेप में स्पष्ट कीजिए कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिटन का दौर ऐतिहासिक दृष्टिकोण से उपलब्धियों से भरा हुआ रहा?
उत्तर:
जार्ज बुश सन् 1992 में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी बिल क्लिटन से राष्ट्रपति पद का चुनाव हार गए। क्लिटन ने अमेरिकी नीतियों में भारी बगलाव किया तथा विदेश नीति के स्थान पर घरेलू नीति को अपने चुनाव प्रचार का प्रमुख हथियार बनाया। बिल क्लिटन सन् 1996 में फिर से राष्ट्रपति का चुनाव जीतने में सफल रहे। इस तरह वे आठ वर्षों तक अमेरिकी राष्ट्रपति के पद पर आसीन रहे। उनके कार्यकाल के दौरान ऐसा लगता था कि अमेरिका ने स्वयं को घरेलू मामलों तक ही सीमित कर लिया लेकिन असल में विदेश नीति के मामले में क्लिटन सरकार ने सैनिक शक्ति तथा सुरक्षा जैसी कठोर राजनीति के स्थान पर लोकतन्त्र के विस्तार, जलवायु परिवर्तन तथा विश्व व्यापार जैसे नरम मुद्दों पर भी ध्यान केन्द्रित किया।

युगोस्लाविया ने अल्बानियाई लोगों के आन्दोलन को दबाने हेतु सैन्य कार्यवाही की; जिसके प्रत्युत्तर में अमेरिकी नेतृत्व में अनेक नाटो देशों में युगोस्लावियाई क्षेत्रों पर दो माह तक बमबारी की। क्लिटन काल में दूसरी बड़ी सैन्य कार्यवाही नैरोबी (केन्या) तथा दारे-सलाम (तंजानिया) के अमेरिकी दूतावासों पर बमबारी के प्रत्युत्तर में सन् 1998 में हुई। इस बमवर्षा के कुछ समयावधि के भीतर राष्ट्रपति क्लिटन ने 'ऑपरेशन इन फाइननाइट रीच' का आदेश दिया और सूडान एवं अफगानिस्तान के अलकायदा के ठिकानों पर अनेक बार क्रूज मिसाइलें दागीं। अमेरिका ने अपनी इस कार्यवाही के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की अनुमति लेने अथवा अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों तक की कोई परवाह नहीं की।

प्रश्न 3. 
11 सितम्बर, 2001 को न्यूयार्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेण्टर पर आक्रमण के पश्चात् आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध में संयुक्त राज्य अमेरिका की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
11 सितम्बर, 2001 को आतंकवादियों ने संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयार्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर एवं अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय वर्जीनिया के आर्लिंगटन स्थित 'पेंटागन' पर हवाई हमले किए; जिसमें लगभग 3000 लोग मारे गये। इस हमले को 'नाइन इलेवन' कहा जाता है। इस आतंकवादी हमले में अलकायदा व तालिबान के सम्मिलित होने की आशंका थी। हमले की प्रतिक्रियास्वरूप संयुक्त राज्य अमेरिका ने आतंकवाद के विरुद्ध कड़े कदम उठाए। उसने आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध के अंग के रूप में 'ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम' चलाया। यह अभियान उन सभी के विरुद्ध था; जिन पर 9/11 की घटना का शक था। इस अभियान में मुख्य निशाना अल-कायदा एवं तालिबान को बनाया गया। 

यद्यपि अमेरिका अल-कायदा व तालिबान को पूरी तरह समाप्त नहीं कर पाया परन्तु उसने इसकी शक्ति को बहुत कम अवश्य कर दिया। इस हमले को रोकने के लिए विश्व के कई देशों ने अमेरिका से आग्रह किया था, परन्तु अमेरिका ने उनकी किसी भी बात पर ध्यान न देते हुए हमले जारी रखे। स्वयं पर हुए इस हमले के पश्चात् अमेरिका खुलकर आतंकवाद के विरोध में सामने आ गया था। अमेरिका ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद को रोकने हेतु कई देशों से समझौते किये, आतंकवाद के पोषित करने वाले देशों पर प्रतिबन्ध लगाने एवं आतंकवादी क्षेत्र में हवाई हमले करना जारी रखा।

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प्रश्न 4. 
अमेरिकी वर्चस्व को दर्शाने वाले शक्ति के किन्हीं चार रूपों का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए। 
उत्तर:
अमेरिकी वर्चस्व को दर्शाने वाले शक्ति के चार रूपों को संक्षेप में निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है। 

  1. सैन्य शक्ति के रूप में अमेरिकी वर्चस्व: अमेरिका की मौजूदा शक्ति का आधार - स्तम्भ उसकी बढ़ी - चढ़ी सैन्य शक्ति है। वर्तमान में अमेरिकी सैन्य शक्ति स्वयं अपने आप में सम्पूर्ण तथा विश्व के सभी देशों से अपेक्षाकृत बेजोड़ है।
  2. ढाँचागत शक्ति के रूप में अमेरिकी वर्चस्व: सामाजिक धारणा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी इच्छा चलाने वाला एकमात्र देश अमेरिका है जो अपने मतलब की चीजों को न सिर्फ बनाता है बल्कि उन्हें बरकरार भी रखता है। अमेरिका के पास व्यवस्था को लागू करने और उसे निरन्तर बनाए रखने की आर्थिक क्षमता है।
  3. सांस्कृतिक शक्ति के रूप में अमेरिकी वर्चस्व: अमेरिका अपनी भाषा, साहित्य, विविध कलाओं, फिल्मों, जीवन प्रणाली तथा शैली को सर्वश्रेष्ठ मानते हुए उसे किसी न किसी तरह से बढ़ावा देता रहता है। वह अन्य देशों को इससे सहमत करने की विपुल शक्ति रखता है।
  4. अमेरिकी आर्थिक वर्चस्व: अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक संस्थाओं के बाजार में भी अमेरिका का ही वर्चस्व चलता है। अमेरिका द्वारा निर्मित नियम-कानून लागू किये जाते हैं। 

प्रश्न 5. 
अमेरिकी वर्चस्व की सैन्य शक्ति के रूप में संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
अथवा 
"आज कोई भी देश अमेरिकी सैन्य शक्ति की तुलना में बराबर नहीं है।" इसके पक्ष में चार तर्क दीजिए।
उत्तर:
सैन्य शक्ति के रूप में अमेरिकी वर्चस्व को निम्न बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है।

  1.  वर्तमान में अमेरिका अपनी सैन्य क्षमता के बलबूते सम्पूर्ण विश्व में कहीं भी निशाना साधने में सक्षम है। अमेरिकी क्षमता एकदम सही समय में सटीक एवं अचूक घातक वार करने की है। अपनी सेना को युद्धभूमि से अधिकतम दूरी पर सुरक्षित रखकर अमेरिका अपने शत्रु को उसी के घर में अपाहिज बना सकता है।
  2. अमेरिका वार्षिक बजट का एक बड़ा हिस्सा सेना पर व्यय करता है। इसका सेना बजट विश्व के बारह शक्तिशाली देश एक साथ मिलकर भी व्यय नहीं कर सकते।
  3. पेंटागन अपने बजट का एक बड़ा भाग रक्षा, अनुसन्धान एवं विकास अर्थात् प्रौद्योगिकी के उच्चीकरण पर व्यय करता है। 
  4. अमेरिकी सैन्य प्रौद्योगिकी दुनिया के शेष सभी देशों से अत्यधिक उत्कृष्ट तथा उन्नत है। 

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प्रश्न 6. 
अमेरिकी आर्थिक वर्चस्व का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अमेरिकी आर्थिक वर्चस्व का अभिप्राय वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसके सर्वाधिक शक्ति-सम्पन्न होने से है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिका के नियम कानून लागू किए जाते हैं। विश्व बैंक, अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व व्यापार संगठन तथा इंटरनेट इत्यादि पर अमेरिकी वर्चस्व स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। खुली वैश्विक अर्थव्यवस्था में मुक्त व्यापार समुद्री व्यापार मार्गों के खुलेपन के बिना सम्भव नहीं है। वर्चस्व (दबदबे) वाला देश अपनी नौसेना की शक्ति से समुद्री व्यापार मार्गों पर आने-जाने के नियम निर्धारित करता है तथा अन्तर्राष्ट्रीय समुद्र में बिना किसी रुकावट के आना-जाना सुनिश्चित करता है। दूसरे महायुद्ध के बाद ब्रिटिश नौसेना की शक्ति में कमी आई है। अब इस भूमिका का निर्वहन अमेरिकी नौसेना द्वारा किया जा रहा है। अमेरिकी नौसेना की उपस्थिति विश्व के लगभग समस्त महासागरों में है।

प्रश्न 7. 
स्पष्ट कीजिए कि अमेरिकी आर्थिक प्रबलता उसकी ढाँचागत शक्ति से अलग नहीं है?
उत्तर:
अमेरिकी आर्थिक प्रबलता उसकी ढाँचागत शक्ति अर्थात् वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक विशेष रूप से ढालने की शक्ति से सम्बद्ध है। दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात् ब्रेटनवुड प्रणाली स्थापित हुई। अमेरिका द्वारा स्थापित यह प्रणाली आज भी विश्व अर्थव्यवस्था की आधारभूत संरचना का कार्य कर रही है। विश्व बैंक, अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व व्यापार संगठन अमेरिकी वर्चस्व का ही परिणाम है।

अमेरिकी ढाँचागत शक्ति का एक मानक उदाहरण एम. बी. ए. जैसी अकादमिक डिग्री है। अमेरिका की स्पष्ट धारणा है कि व्यवसाय स्वयं में एक कौशल पर आश्रित पेशा है और इस दक्षता अर्थात् कौशल को विश्वविद्यालय में प्राप्त किया जा सकता है। 1881 में यूनीवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया में वाहटर्न स्कूल नामक विश्व का प्रथम बिजनेस स्कूल खुला। लेकिन एम. बी. ए. के प्रारिम्भक पाठ्यक्रम 1900 से शुरू हुए। उल्लेखनीय है कि अमेरिका से बाहर एम. बी. ए. पाठ्यक्रम की शुरूआत 1950 में हुई। आज विश्व में कोई भी ऐसा देश शेष नहीं बचा है; जिसमें एम. बी. ए. को एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक डिग्री की श्रेणी में न रखा जाता हो।

प्रश्न 8. 
वर्तमान विश्व में संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रभुत्व का क्या आशय है? अमेरिका के प्रभुत्व पर किन्हीं दो बाधाओं का वर्णन कीजिए।
अथवा
अमेरिकी वर्चस्व से क्या अभिप्राय है? अमेरिकी शक्ति के रास्ते में अवरोध उत्पन्न करने वाले किन्हीं दो अवरोधों को. बताइए।
अथवा 
अमेरिकी वर्चस्व के रास्ते की किन्हीं दो बाधाओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
वर्तमान विश्व में संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रभुत्व का अर्थ यह है कि अमेरिका आज विश्व का सर्वाधिक शक्तिशाली देश है; जिसका सम्पूर्ण विश्व में प्रभाव है। अमेरिका की इच्छानुसार ही विश्व राजनीति में निर्णय लिए जाते हैं एवं यदि कोई देश अमेरिका की इच्छानुसार कार्य नहीं करता है तो अमेरिका उस पर कई प्रकार के प्रतिबन्ध लगा देता है। इसके अतिरिक्त वह सैन्य बल का प्रयोग भी करता है। वर्तमान विश्व में अमेरिका के प्रभुत्व के रास्ते में निम्न दो बाधाएँ (अवरोध) प्रमुख हैं।
(i) अमेरिका की संस्थागत बुनावट: अमेरिकी प्रभुत्व के मार्ग में पहली बाधा स्वयं अमेरिका की संस्थागत बुनावट है। देश में शासन के तीनों अंगों के बीच शक्ति का विभाजन किया गया है। यह प्रावधान कार्यपालिका द्वारा सैन्य शक्ति के अनियन्त्रित प्रयोग पर अंकुश लगाने का कार्य करता है।

(ii) नाटो - अमेरिकी प्रभुत्व के मार्ग का दूसरा व्यवधान सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। वर्तमान अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था में सिर्फ एक संगठन सम्भवतः अमेरिका शक्ति पर अंकुश लगा सकता है और वह संगठन नाटो है। अमेरिकी हित लोकतान्त्रिक देशों के नाटो संगठन को बनाए रखने से सम्बद्ध हैं क्योंकि इन देशों में बाजारमूलक अर्थव्यवस्था चलती है। इस कारण इस बात की प्रबल सम्भावना है कि नाटो में सम्मिलित अमेरिका के मित्र राष्ट्र उसके वर्चस्व पर कुछ प्रभावी अंकुश लगा सकें।

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प्रश्न 9. 
शीतयुद्ध के पश्चात् भारत-अमेरिकी सम्बन्धों पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।।
उत्तर:
सन् 1991 में सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् अमेरिका व सोवियत संघ के मध्य चला आ रहा शीतयुद्ध भी समाप्त हो गया। शीतयुद्ध के वर्षों में भारत सोवियत संघ का निकटतम मित्र था। सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् भारत मित्रविहीन हो गया। इसी अवधि में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण कर उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ा। पिछले कुछ वर्षों में भारत की आर्थिक विकास दर में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे अमेरिका भी आर्थिक दृष्टि से भारत के महत्त्व को पहचानने लगा है।

धीरे - धीरे दोनों देशों के मध्य विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है। दूसरी ओर, भारत एवं अमेरिका दोनों देशों को आतंकवादी गतिविधियों का सामना करना पड़ रहा है इसलिए भी दोनों देशों के मध्य सम्बन्धों में घनिष्ठता आयी है। दोनों देशों के राजनायकों व उच्चाधिकारियों ने एक-दूसरे के यहाँ यात्राएँ भी की हैं। शीतयुद्ध के पश्चात् भारत और अमेरिका के मध्य अनेक समझौते भी हुए हैं, जिनमें से हाल ही में हुआ परमाणु ऊर्जा समझौता प्रमुख है। 

प्रश्न 10. 
भारत - अमेरिकी सम्बन्धों के सन्दर्भ में भारत में किन - किन सम्भावित रणनीतियों पर बहस चल रही है?
उत्तर:
भारत - अमेरिकी सम्बन्धों के सन्दर्भ में भारत में निम्नलिखित तीन सम्भावित रणनीतियों पर बहस चल रही है।

  1. अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति को सैन्य शक्ति के सन्दर्भ में देखने वाले भारत के विद्वान भारत व अमेरिका की बढ़ती हुई समीपता से भयभीत हैं। इनके अनुसार भारत वाशिंगटन से अपना अलगाव बनाए व सम्पूर्ण ध्यान अपनी राष्ट्रीय शक्ति को बढ़ाने में लगाये।
  2. कुछ विद्वानों के अनुसार भारत और अमेरिका के हितों में मेलजोल लगातार बढ़ रहा है जो भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। भारत को अमेरिकी वर्चस्व का लाभ उठाना चाहिए।
  3. कुछ विद्वानों का मत है कि भारत अपने नेतृत्व में विकासशील देशों के गठबन्धन का निर्माण करे। कुछ वर्षों में यह गठबन्धन शक्तिशाली हो जायेगा तथा अमेरिकी वर्चस्व के प्रतिकार में सक्षम हो जायेगा। 

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प्रश्न 11. 
बैंडवैगन की रणनीति से क्या आशय है? "यह अपने को छुपा ले" की रणनीति से कैसे भिन्न है?
उत्तर:
बैंडवैगन रणनीति से आशय: किसी देश को सबसे ताकतवर देश के विरुद्ध रणनीति बनाने के स्थान पर उसक वचस्व तन्त्र में रहते हुए अवसरों का लाभ उठाने की रणनीति को ही बैंडवैगन की रणनीति कहते हैं। बैंडवैगन की रणनीति अमेरिकी वर्चस्व से सम्बन्धित है। विश्व के रणनीतिकारों के लिए सदैव यह एक जटिल प्रश्न रहा है कि अमेरिका के वर्चस्व से कैसे बचा जाए। कुछ रणनीतिकारों का तर्क है कि अमेरिका से संघर्ष करने की अपेक्षा उसके वर्चस्व में रहते हुए अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए। उदाहरण के लिए एक देश की आर्थिक वृद्धि दर को ऊँचा करने के लिए व्यापार को बढ़ाना, प्रौद्योगिकी का हस्तान्तरण व निवेश बहुत जरूरी है और यह सब अमेरिका के साथ रहकर ही आसानी से पूरा हो सकता है न कि उसका विरोध करने से। ऐसे में सुझाव दिया जाता है कि सबसे शक्तिशाली देश के विरुद्ध जाने की अपेक्षा उसके वर्चस्व तन्त्र में रहते हुए अवसरों का लाभ उठाना ही कहीं उचित रणनीति है। इसे ही बैंडवैगमन अथवा "जैसी बहे बयार पीठ तैसी कीजै" की रणनीति के नाम से जाना जाता है।

अपने को ' छुपा ले' की रणनीति बैंडवैगन की रणनीति से भिन्न है। छुपा ले की नीति के तहत एक देश अपने आपको इस प्रकार छुपा लेता है कि वह अमेरिका की नजरों में न चढ़ पाए ताकि वह उसके बेवजह क्रोध से बचा रहे। यह रणनीति छोटे देशों के लिए संगत व आकर्षक हो सकती है। छोटे देश अमेरिका से अपने आपको अलग रखकर उसके अनावश्यक क्रोध से बच सकते हैं तथा अपनी स्वतन्त्र विदेश नीति का निर्माण कर सकते हैं। परन्तु 'छुपा ले' की यह नीति बड़े देशों के लिए कामयाब नहीं हो सकती।

 निबन्धात्मक प्रश्न:
 
प्रश्न 1. 
खाड़ी युद्धों एवं अफगानिस्तान युद्ध के विशेष सन्दर्भ में एकधुवीय विश्व के विकास की विस्तार से व्याख्या: कीजिए।
अथवा 
विश्व स्तर पर घटित कौन-कौन सी घटनाओं से संयुक्त राज्य अमेरिका के एकाधिकार पता चलता है?
अथवा 
अमेरिका के इराक आक्रमण के कारणों पर प्रकाश डालिए।
अथवा
संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा किए गए किन्हीं तीन ऑपरेशन (सैन्य कार्रवाइयों) का वर्णन कीजिए जिनसे अमेरिका की सैन्य शक्ति की सर्वोच्चता सिद्ध एवं स्थापित हुई।
उत्तर:
सोवियत संघ के पतन के पश्चात् शीतयुद्ध की समाप्ति हो गयी। द्विध्रुवीय व्यवस्था के स्थान पर एकध्रुवीय व्यवस्था स्थापित हो गयी। अब अमेरिका को कोई भी देश चुनौती देने की स्थिति में नहीं रहा। इस स्थिति का लाभ उठाकर संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने प्रभाव को और अधिक बढ़ाना प्रारम्भ कर दिया और विश्व के कई देशों में उसने सैन्य हस्तक्षेप करना प्रारम्भ कर दिया। विश्व स्तर पर घटित निम्नलिखित घटनाओं से एकध्रुवीय विश्व (संयुक्त राज्य अमेरिका के एकाधिकार) के विकास की जानकारी प्राप्त होती है।

(i) प्रथम खाड़ी युद्ध: संयुक्त राज्य अमेरिका के एकाधिकार के विकास अर्थात् एकध्रुवीय विश्व का प्रारम्भ हम प्रथम खाड़ी युद्ध को मान सकते हैं। जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी सैन्य शक्ति के बल पर कुवैत को इराक से स्वतन्त्र करवाया था। अगस्त 1990 में इराक ने अपने पड़ोसी देश कुवैत पर हमला कर उस पर अपना नियन्त्रण स्थापित कर लिया। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र संघ से इराक पर बल प्रयोग की अनुमति प्राप्त कर ली ताकि कुवैत को उसके चंगुल से आजाद किया जा सके। अमेरिका के नेतृत्व में 34 देशों की लगभग 6.60 लाख सैनिकों की फौज ने इराक पर हमला कर उसे परास्त कर दिया। इस सैनिक अभियान में लगभग 75 प्रतिशत अमेरिकी सैनिक सम्मिलित थे तथा अमेरिकी जनरल ही इस सैन्य अभियान का प्रमुख था। इस युद्ध ने विश्व स्तर पर अमेरिकी सैनिक ताकत को बहुत अधिक बढ़ा दिया था, जिससे विश्व एकध्रुवीय व्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ने लगा।

(ii) सूडान व अफगानिस्तान पर क्रूज मिसाइलों से हमला: बिल क्लिटन के शासनकाल में सन् 1998 में नैरोबी (केन्या) एवं दारे - सलाम (तंजानिया) स्थित अमेरिकी दूतावासों पर बम विस्फोट हुए। अतिवादी इस्लामी विचारों से प्रभावित आतंकवादी संगठन अलकायदा को इस बमबारी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया परिणामस्वरूप संयुक्त राज्य अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिटन ने 'ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच' का आदेश दिया।

इस अभियान के तहत अमेरिका ने सूडान एवं अफगानिस्तान में अलकायदा के ठिकानों पर कई बार क्रूज मिसाइलों से हमले किये गये। संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी इस कार्यवाही के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की अनुमति नहीं ली तथा न ही इस मामले में अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों की परवाह की। इससे सिद्ध होता है कि अमेरिका को विश्व में किसी की भी परवाह नहीं है। यह इसके वर्चस्व को इंगित करता है।

(iii) 9/11की घटना एवं आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध:11 सितम्बर, 2001 को अरब देशों के 19 अपहरणकर्ताओं ने संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयार्क स्थिति वर्ल्ड ट्रेड सेण्टर एवं वर्जीनिया स्थिति अमेरिका रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन पर हमला किया। इस हमले में लगभग 3000 लोग मारे गये।

अमेरिकन लोगों सहित समस्त विश्व के लिए यह दिल दहला देने वाली घटना थी। अमेरिका ने प्रतिक्रियात्मक आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध के अंग के रूप में 'ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम' चलाया। इस अभियान का मुख्य निशाना अलकायदा व अफगानिस्तान के तालिबान शासन को बनाया गया। अमेरिका अलकायदा तथा तालिबान को पूरी तरह समाप्त नहीं कर पाया परन्तु उसने इसकी शक्ति को बहुत कम अवश्य कर दिया। अमेरिकी सेना ने सम्पूर्ण विश्व में गिरफ्तारियाँ की तथा गिरफ्तार लोगों के बारे में उनकी सरकारों तक को बताना, अमेरिकी सरकार ने जरूरी नहीं समझा।

विभिन्न देशों से गिरफ्तार लोगों को अलग-अलग देशों के खुफिया जेलखानों में बन्द कर दिया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिकारियों को भी इन बन्दियों से नहीं मिलने दिया गया। इस प्रकार यह घटना संयुक्त राज्य अमेरिका की विश्व जनमत व संयुक्त राष्ट्र संघ की परवाह न करने की शक्ति को बताती है। इससे स्पष्ट है कि अमेरिका विश्व की एक बड़ी सैनिक ताकत है।

(iv) इराक पर आक्रमण: विश्व के एकध्रुवीय होने की पुष्टि एक अन्य महत्त्वपूर्ण घटना से भी हुई; जब 19 मार्च, 2003 को अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र संघ की अनुमति न देने पर भी तथा विश्व जनमत की परवाह न करते हुए ऑपरेशन इराकी फ्रीडम के कूटनाम से इराक पर सैन्य हमला किया। अमेरिकी नेतृत्व वाले कॉअलिशन ऑफ वीलिंग्स (आकांक्षियों का महजोट) में 40 से अधिक देश सम्मिलित हुए। संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा सम्पूर्ण विश्व को यह बताया गया कि इराक को सामूहिक संहार के हथियार बनाने से रोकने के लिए उसके द्वारा यह हमला किया गया। इराक पर लगाया गया यह आरोप निराधार साबित हुआ क्योंकि इराक में सामूहिक संहार के हथियारों की मौजूदगी के कोई प्रमाण नहीं मिले।

इस हमले के पीछे अमेरिका का मूल उद्देश्य इराक के तेल भण्डारों पर नियन्त्रण करना तथा अपने पसन्द की सरकार स्थापित करना था। उपर्युक्त घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अमेरिका को विश्व के किसी भी देश की परवाह नहीं है, न ही संयुक्त राष्ट्र संघ की परवाह है। अमेरिकी शक्ति के विस्तार से विश्व एकध्रुवीय होता जा रहा है। आज अमेरिका विश्व की एकमात्र महाशक्ति है। 

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प्रश्न 2. 
9/11 की घटना एवं आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध का विस्तार से वर्णन कीजिए।
अथवा 
संयुक्त राज्य अमेरिका में घटित 'नाइन-इलेवन' की घटना एवं उसकी प्रतिक्रिया स्वरूप अमेरिका द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका में घटित 9/11 की घटना - 11 सितम्बर, 2001 को संयुक्त राज्य अमेरिका के इतिहास में बहुत बड़ी दुखद घटना घटी। अरब देशों के लगभग 19 अपहरणकर्ताओं ने उड़ान भरने के कुछ मिनटों के पश्चात् चार अमेरिकी व्यावसायिक विमानों पर नियन्त्रण स्थापित कर लिया। अपहरणकर्ता इन विमानों को अमेरिका की महत्त्वपूर्ण इमारतों की सीध में उड़ाकर ले गये तथा उन्हें निशाना बनाया। दो विमानों ने न्यूयार्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेण्टर के उत्तरी व दक्षिणी टॉवर को निशाना बनाकर उनमें टक्कर मारी। एक तीसरा विमान वर्जीनिया राज्य के अर्लिंगटन में स्थित पेंटागन से टकराया, पेंटागन अमेरिकी रक्षा विभाग का मुख्यालय है।

चौथा विमान जिसे अमेरिकी कांग्रेस की मुख्य इमारत से टकराना था, लेकिन यह पेन्सिलवेनिया के एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हमले को संयुक्त राज्य अमेरिका में 9/11 अथवा नाइन इलेवन के नाम से जाना जाता है; क्योंकि अमेरिका में महीने को तिथि से पहले लिखने का प्रचलन है, जबकि भारत में इसे 9/11 के स्थान पर 11/9 लिखा जाता है। 9/11 के हमले का प्रभाव-संयुक्त राज्य अमेरिका पर हुए 9/11 के आतंकवादी हमले में लगभग 3,000 लोग मारे गये। अमेरिकियों के लिए यह दिल दहला देने वाली घटना थी। 1776 ई. में स्वतन्त्र होने के पश्चात् से लेकर आज तक उसे इस प्रकार के किसी भी बड़े हमले का अपनी भूमि पर सामना नहीं करना पड़ा था।

अमेरिका द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध की घोषणा: 9/11 की घटना की संयुक्त राज्य अमेरिका में तीव्र प्रतिक्रिया हुई। यहाँ की सरकार ने तुरन्त कदम उठाये एवं भयंकर कार्यवाही की। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू. बुश ने अमेरिकी हितों को लेकर कठोर रुख अपनाया। उन्होंने आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध की घोषणा की।

आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध के अंग के रूप में अमेरिका ने 'ऑपरेशन इन्ड्यूरिंग फ्रीडम' का. संचालन किया। यह एक ऐसा अभियान था; जिसमें शक के आधार पर किसी भी व्यक्ति, संगठन अथवा देश के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है; जो संयुक्त राज्य अमेरिका के विरुद्ध आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न हो। संयुक्त राज्य अमेरिका ने 9/11 के आक्रमण के लिए मुख्य रूप से अलकायदा व अफगानिस्तान के तालिबान शासन को उत्तरदायी ठहराया।

अमेरिका द्वारा की गयी सैन्य कार्यवाहियाँ: 9/11 की घटना के प्रतिक्रियास्वरूप अमेरिका ने 'ऑपरेशन इन्ड्यूरिंग फ्रीडम' के तहत शक के आधार पर अलकायदा नामक आतंकवादी संगठन व अफगानिस्तान के तालिबान शासन पर हमला करने के साथ-साथ अनेक स्वतन्त्र देशों में उन देशों की सरकारों की इजाजत के बिना गिरफ्तारियाँ की।

विभिन्न देशों में गिरफ्तार लोगों को अलग - अलग देशों में भेजकर, वहाँ के खुफिया जेलखानों में बन्द कर दिया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिनिधियों को भी इन बन्दियों से मिलने तक नहीं दिया गया। संयुक्त राज्य अमेरिका ने पूरी तरह से संयुक्त राष्ट्र संघ की ही अवहेलना नहीं की बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन भी किया। इस तरह संयुक्त राज्य अमेरिका ने 9/11 की घटना के विरोध में अपनी आतंकवादी विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया। 

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प्रश्न 3. 
9/11 के बाद अमेरिकी विदेश नीति में क्या परिवर्तन आए और इसका विश्व राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
9/11 की घटना 11 सितम्बर, 2001 को अरब देशों के 19 आतंकवादियों ने संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयार्क स्थिति वर्ल्ड ट्रेड सेंटर एवं वर्जीनिया स्थिति अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन पर हमला कर दिया। इस हमले में लगभग 3000 लोग मारे गये।

9/11 के बाद अमेरिकी विदेश नीति में परिवर्तन: 9/11 की घटना अमेरिकन लोगों सहित समस्त विश्व के लिए एक दिल दहलाने वाली घटना थी। 9/11 की घटना की संयुक्त राज्य अमेरिका में तीव्र प्रतिक्रिया हुई। संयुक्त राज्य अमेरिका सरकार ने जनता की माँग के अनुरूप विदेश नीति में परिवर्तन कर तुरन्त कदम उठाये एवं भयंकर कार्यवाही की। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू. बुश ने अमेरिकी हितों को लेकर कठोर रुख अपनाया उन्होंने आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध की घोषणा की।

आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका ने ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम का संचालन किया। यह एक ऐसा अभियान था जिसमें शक के आधार पर किसी भी व्यक्ति, संगठन अथवा देश के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती थी जो संयुक्त राज्य अमेरिका के विरुद्ध आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न हो।  संयुक्त राज्य अमेरिका ने 9/11 के आक्रमण के लिए मुख्य रूप से अलकायदा नामक संगठन व अफगानिस्तान के तालिबान शासन को उत्तरदायी ठहराया।
 

संयुक्त राज्य अमेरिका के अलकायदा व तालिबान शासन पर हमला करने के साथ-साथ अनेक स्वतन्त्र देशों से गिरफ्तार लोगों को अलग - अलग देशों में उन देशों की सरकारों की बिना अनुमति के गिरफ्तारियाँ की। विभिन्न देशों में भेजकर वहाँ के खुफिया जेलखानों में बन्द कर दिया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिनिधियों को भी इन बंदियों से मिलने तक नहीं दिया गया। संयुक्त राज्य अमेरिका ने आतंकवाद से निपटने में संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ-साथ अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों की भी अवहेलना की। इस तरह अमेरिका ने आतंकवाद विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया।

9/11 की घटना का विश्व राजनीति पर प्रभाव: 11 सितम्बर, 2001 को आतंकवादियों द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर व पेंटागन पर हमला किया गया। इस घटना का विश्व राजनीति पर बहुत प्रभाव पड़ा। इस घटना के उपरान्त अमेरिका एवं दूसरे अन्य देशों की सरकारें आतंकवाद पर अधिक ध्यान देने लगीं। हालांकि आतंकवाद कोई नवीन परिघटना नहीं थी। पूर्व में आतंकवाद की अधिक घटनाएँ मध्य पूर्व-यूरोप, लातिनी अमेरिका तथा दक्षिण एशिया में हुई थीं। इस तिथि के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कई देशों ने आतंकवाद के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है। इस घटना के पश्चात् विश्व में अमेरिकी वर्चस्व की वृद्धि हुई है। 

प्रश्न 4. 
अमेरिकी वर्चस्व को दर्शाने वाली शक्ति के विभिन्न रूपों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
अथवा 
महाशक्ति के रूप में अमेरिकी वर्चस्व का मूल्यांकन कीजिए।
अथवा 
अमेरिकी वर्चस्व के विभिन्न आयामों का विस्तार से वर्णन कीजिए। 
उत्तर:
अमेरिकी वर्चस्व को दर्शाने वाली शक्ति के विभिन्न रूप (आयाम या व्याख्याएँ) निम्नलिखित हैं। 
(i) सैन्य शक्ति के रूप में अमेरिका का वर्चस्व: अमेरिकी शक्ति की रीढ़ उसकी बढ़ी - चढ़ी सैनिक शक्ति है। वर्तमान में अमेरिका की सैन्य शक्ति स्वयं में अनूठी तथा शेष देशों से अपेक्षाकृत बेजोड़ है। आज अमेरिका अपनी सैन्य क्षमता के बलबूते सम्पूर्ण विश्व में कहीं भी निशाना लगाने में सक्षम है। उसके पास एकदम सही समय में अचूक तथा घातक वार करने की क्षमता मौजूद है। अपने सैनिकों को युद्धभूमि से अधिकतम दूरी पर सुरक्षित रखकर वह अपने शत्रु को उसी के घर में अपाहिज बना सकता है।

अमेरिकी सैनिक शक्ति का सर्वाधिक चमत्कारी तथ्य यह है कि वर्तमान में कोई भी देश अमेरिकी सैन्य शक्ति की तुलना में उसके बराबर नहीं है। अमेरिका से नीचे के कुल बारह शक्तिशाली देश एक साथ मिलकर अपनी सैन्य क्षमता के लिए जितनी धनराशि व्यय करते हैं; उसके लंगभग बराबर अकेले अमेरिका व्यय करता है। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि पेंटागन अपने बजट का एक बड़ा भाग रक्षा अनुसंधान एवं विकास अर्थात् प्रौद्योगिकी पर व्यय करता है। अमेरिकी सैन्य प्रभुत्व का आधार केवल उच्च सैनिक व्यय ही नहीं है बल्कि उसकी गुणात्मक बढ़त भी है। वर्तमान में अमेरिका सैन्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इतना आगे बढ़ चुका है कि किसी भी देश के लिए उसकी बराबरी पर पहुँच पाना असम्भव हो गया है। 

(ii) ढाँचागत शक्ति के रूप में अमेरिका का वर्चस्व-संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्चस्व में ढाँचागत शक्ति का भी विशेष योगदान है। वर्चस्व की ढाँचागत शक्ति का अर्थ है-वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी इच्छा चलाने वाले एक देश की आवश्यकता होना जो अपने मतलब की वस्तुओं को बरकरार रखता है। आज अमेरिका विश्व के प्रत्येक हिस्से, वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं प्रौद्योगिकी के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्शा रहा है। अमेरिका की विश्व अर्थव्यवस्था में 21 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। विश्व की प्रत्येक तीन बड़ी कम्पनियों में से एक अमेरिकन कम्पनी है।

आज विश्व के प्रमुख आर्थिक संगठनों; जैसे-विश्व व्यापार संगठन, विश्व बैंक एवं अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष पर अमेरिकी प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। अमेरिका की ढाँचागत ताकत का एक मानक उदाहरण मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एम. बी. ए.) की अकादमिक डिग्री है। आज दुनिया में कोई भी देश ऐसा नहीं है जिसमें एम. बी. ए. को एक प्रतिष्ठित अकादमिक डिग्री का दर्जा हासिल न हो। यह डिग्री अमेरिका की देन है।

(iii) सांस्कृतिक शक्ति के रूप में अमेरिका का वर्चस्व-सांस्कृतिक अर्थ में वर्चस्व का सम्बन्ध 'सहमति गढ़ने की ताकत से है। कोई प्रभावशाली वर्ग या देश अपने प्रभाव में रहने वाले लोगों को इस तरह सहमत करता है कि वे भी दुनिया को उसी नजरिये से देखें; जिस नजरिये से प्रभुत्वशाली वर्ग या देश देख रहा है।

इससे प्रभुत्वशाली वर्ग के देश की बढ़त और उसका वर्चस्व कायम होता है। अमेरिकी संस्कृति बड़ी लुभावनी है और इसी कारण सबसे ज्यादा ताकतवर है। 20वीं शताब्दी एवं 21वीं शताब्दी के आरम्भ में सांस्कृतिक क्षेत्र में जो परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं, वे सब अमेरिकन संस्कृति के ही प्रतिबिम्ब हैं। उदाहरण के लिए अमेरिका में प्रचलित नीली जीन्स को आज विश्व के अधिकांश देशों के लोग जानने लगे हैं और यह अच्छे जीवन का प्रतीक बन गयी है। 

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प्रश्न 5. 
विश्व राजनीति में अमेरिकी सैन्य शक्ति के वर्चस्व की विवेचना कीजिए। 
अथवा 
सैन्य शक्ति के रूप में अमेरिकी वर्चस्व का परीक्षण कीजिए।
अथवा 
"अमेरिका की मौजूदा ताकत की रीढ़ उसकी बढ़ी-चढ़ी सैन्य शक्ति है।" किन्हीं तीन उपयुक्त तर्कों द्वारा इस कथन को न्यायसंगत सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
वर्चस्व का अर्थ-अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में वर्चस्व का अर्थ शक्ति का केवल एक ही केन्द्र के होने से है।

वर्चस्व सैन्य शक्ति के अर्थ में-यूनानी भाषा में 'हेगेमनी' शब्द का अर्थ; किसी एक राज्य की सैन्य क्षमता की बुनावट एवं तौल से लिया जाता है। यही कारण है कि यह शब्द आज विश्व राजनीति में अमेरिका की सैन्य शक्ति को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह शक्ति भौतिक शक्ति के वर्चस्व को ही दिखाती है, आत्मिक वर्चस्व को नहीं। उदाहरण के लिए, आयशा की एक टाँग संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा किये गये हमले में जाती रही। यही है वह सैन्य वर्चस्व जिसने उसकी आत्मा को तो नहीं लेकिन उसके शरीर को जरूर अपाहिज बना दिया।
सैन्य शक्ति के रूप में अमेरिकी वर्चस्व को निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया जा सकता है। 

(i) बेजोड़ एवं अनूठी सैन्य शक्ति: संयुक्त राज्य अमेरिका की शक्ति की रीढ़ उसकी बढ़ी - चढ़ी सैनिक शक्ति है। वर्तमान समय में सैन्य शक्ति स्वयं में अनूठी एवं शेष देशों से अपेक्षाकृत बेजोड़ है। आज अमेरिका अपनी सैन्य क्षमता के बलबूते सम्पूर्ण विश्व में कहीं भी निशाना लगाने में सक्षम है। उसके पास एकदम सही समय में अचूक एवं घातक वार करने की क्षमता मौजूद है। अपने सैनिकों को युद्धभूमि से अधिकतम दूरी पर सुरक्षित रखकर वह अपने शत्रु को उसी के घर में अपाहिज बना सकता है। 

(ii) सैन्य खर्च: अमेरिकी सैनिक शक्ति का सबसे चमत्कारी तथ्य यह है कि वर्तमान समय में कोई भी देश अमेरिकी सैन्य शक्ति की तुलना में उसके बराबर नहीं है। अमेरिका से नीचे के 12 शक्तिशाली देश एक साथ मिलकर अपनी सैन्य क्षमता के लिए जितना खर्च करते हैं; लगभग उतना अपनी सैन्य क्षमता के लिए स्वयं अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका करता है। संयुक्त राज्य अमेरिका का अकेले सैन्य खर्च 602.8 अरब डालर है, जबकि चीन, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, भारत, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया व ब्राजील समस्त 12 देशों का कुल सैन्य खर्च 640.9 अरब डालर है। अतः सैन्य खर्च में अमेरिका की बराबरी कर पाना किसी भी देश के लिए सम्भव प्रतीत नहीं होता है। इसके अतिरिक्त अमेरिकी रक्षा विभाग अपने बजट का एक बड़ा भाग रक्षा अनुसन्धान एवं विकास अर्थात् प्रौद्योगिकी पर व्यय करता है।

(iii) सैन्य दृष्टि से गुणात्मक बढ़त: संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन्य प्रभुत्व का आधार केवल उच्च सैनिक व्यय नहीं है बल्कि उसकी गुणात्मक बढ़त भी है। वर्तमान समय में संयुक्त राज्य अमेरिका सैन्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इतना आगे निकल चुका है कि किसी भी देश के लिए उसकी बराबरी पर पहुँच पाना असम्भव हो गया है।

(iv) जन मनोबल को अपने समक्ष झुका पाने में पूर्ण समर्थ नहीं: यद्यपि इराक पर अमेरिकी आक्रमण से उसकी कुछ कमजोरियाँ उजागर हुई हैं। इराक पर अमेरिकी हमले से अमेरिकी सैन्य क्षमता की यह कमजोरी अवश्य दिखाई दी है कि वह इराक की जनता को अपनी सेना के समक्ष झुका पाने में सफल नहीं हुई है। वह अपने अधिकृत भू-भाग में कानून व्यवस्था बहाल करने में सफल नहीं हो पाया है। इराक के उदाहरण से प्रकट है कि संयुक्त राज्य अमेरिका की विजय क्षमता विकट है। इसी तरह उसकी अपराध करने एवं दण्ड देने की क्षमता भी स्वतः सिद्ध है, लेकिन कानून व्यवस्था बनाये रखने की उसकी क्षमता पर सन्देह प्रकट हुआ है। 

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प्रश्न 6. 
ढाँचागत ताकत के रूप में अमेरिकी वर्चस्व का परीक्षण कीजिए।
उत्तर:
ढाँचागत ताकत के अर्थ के रूप में अमेरिकी वर्चस्व को हम अग्रलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट कर सकते हैं।
(i) वैश्विक अर्थव्यवस्था की विशेष समझ: ढाँचागत ताकत के अर्थ में, अमेरिकी वर्चस्व का सम्बन्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था की विशेष समझ से है। इस समझ की बुनियादी धारणा यह है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी इच्छा चलाने वाला एक ऐसा देश जरूरी होता है; जो अपने मतलब की वस्तुओं को बनाये एवं बरकरार रखे। ऐसे देशों के लिए आवश्यक है कि उसके पास व्यवस्था बनाये रखने के लिए नियम - कानूनों को लागू करने की क्षमता एवं इच्छा हो।

साथ ही यह जरूरी है कि वह वैश्विक व्यवस्था को हर हालत में बनाये रखे। दबदबे वाला देश ऐसा अपने लाभ के लिए करता है, लेकिन अक्सर इसमें उसे कुछ आपेक्षिक हानियाँ उठानी पड़ती हैं। दूसरे प्रतियोगी देश अर्थव्यवस्था के खुलेपन का लाभ उठाते हैं; जबकि इस खुलेपन को बनाये रखने के लिए उन्हें कोई भी खर्च नहीं करना पड़ता है।

(ii) विश्वव्यापी सार्वजनिक वस्तुओं को उपलब्ध कराने में प्रभावी भूमिका: ढाँचागत शक्ति के वर्चस्व की झलक हमें विश्वव्यापी सार्वजनिक वस्तुओं को उपलब्ध कराने की अमेरिकी भूमिका में मिलती है। सार्वजनिक वस्तुओं से आशय ऐसी वस्तुओं से है जिसका उपभोग कोई एक व्यक्ति करे तो दूसरे को उपलब्ध इसी वस्तु की मात्रा में कोई कमी नहीं आये। स्वच्छ वायु एवं सड़क सार्वजनिक वस्तुओं के उदाहरण हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था के सन्दर्भ में सार्वजनिक वस्तु का सबसे अच्छा उदाहरण समुद्री व्यापार मार्ग (सी लेन ऑफ कम्युनिकेशन्स) है; जिसका उपयोग व्यापारिक जहाज करते हैं।

(iii) समुद्री व्यापार मार्गों पर आवागमन के नियम निर्धारित करना: खुली वैश्विक अर्थव्यवस्था में मुक्त व्यापार, समुद्री व्यापार मार्गों के खुलेपन के बिना सम्भव नहीं है। दबदबे वाला देश अपनी नौसेना की ताकत से समुद्री व्यापार मार्गों पर आवागमन के नियम निर्धारित करता है एवं अन्तर्राष्ट्रीय समुद्र में बाधारहित आवागमन को सुनिश्चित करता है। द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् ब्रिटिश नौसेना की ताकत घट गयी। इससे पूर्व ब्रिटिश नौसेना ही ऐसे नियम तय करती थी। वर्तमान समय में यह भूमिका अमेरिकी नौसेना निभा रही है। अमेरिका नौसेना की उपस्थिति विश्व के लगभग समस्त महासागरों में दिखाई देती है।

(iv) इंटरनेट पर अमेरिकी वर्चस्व: वैश्विक सार्वजनिक वस्तु का एक अन्य उदाहरण है-इंटरनेट। यद्यपि इंटरनेट के माध्यम से वर्ल्ड वाइड वेब (जगत-जोड़ता-जाल) का आभासी संसार साकार होता दिखाई देता है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इंटरनेट अमेरिकी सैन्य अनुसन्धान परियोजना का परिणाम है। इंटरनेट से सम्बन्धित यह परियोजना सन् 1950 में प्रारम्भ हुई थी। आज भी इंटरनेट उपग्रहों के एक वैश्विक तन्त्र पर निर्भर है और इनमें से अधिकांश उपग्रह संयुक्त राज्य अमेरिका के हैं।

(v) विश्व की अर्थव्यवस्था में अमेरिका की अधिक हिस्सेदारी: संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व के प्रत्येक भाग, वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र एंव प्रौद्योगिकी के प्रत्येक क्षेत्र में विद्यमान है। विश्व की अर्थव्यवस्था में अमेरिकी हिस्सेदारी 21 प्रतिशत है। विश्व के कुल व्यापार में अमेरिकी हिस्सेदारी लगभग 14 प्रतिशत है। विश्व की अर्थव्यवस्था का एक भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जिसमें कोई अमेरिका कम्पनी अग्रणी तीन कम्पनियों में से एक नहीं है। इस प्रकार की अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

(vi) वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक विशेष आकार में ढालने की शक्ति: संयुक्त राज्य अमेरिका की आर्थिक प्रबलता उसकी वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक विशेष आकार में ढालने की शक्ति से जुड़ी हुई है। द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् ब्रेटनवुड प्रणाली कायम हुई थी। संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा स्थापित यह प्रणाली आज भी विश्व की अर्थव्यवस्था की बुनियादी संरचना का कार्य कर रही है। इस तरह हम विश्व बैंक, अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं विश्व व्यापार संगठन को अमेरिकी ढाँचागत वर्चस्व का परिणाम मान सकते हैं।

अमेरिका की ढाँचागत शक्ति का एक मानक उदाहरण एम.बी.ए. (मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) की अकादमिक डिग्री है। यह विशुद्ध रूप से अमेरिकी धारणा है कि व्यवसाय अपने आप में एक पेशा है; जो कौशल पर निर्भर करता है। इस कौशल को विश्वविद्यालय में अर्जित किया जा सकता है। सन् 1881 में पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के वार्टन स्कूल में विश्व का प्रथम बिजनेस स्कूल खुला। एम.बी.ए. के शुरूआती पाठ्यक्रम सन् 1900 से प्रारम्भ हुए। आज दुनिया में कोई भी देश ऐसा नहीं है; जिसमें एम.बी.ए. को एक प्रतिष्ठित अकादमिक डिग्री का दर्जा प्राप्त न हो। 

प्रश्न 7. 
सांस्कृतिक अर्थ में अमेरिकी वर्चस्व की विस्तार से विवेचना कीजिए।
अथवा 
अमेरिकी सांस्कृतिक वर्चस्व की विवेचेना कीजिए।
अथवा 
संयुक्त राज्य अमेरिका के सांस्कृतिक वर्चस्व की किन्हीं चार विशेषताओं का वर्णन कीजिए। 
उत्तर:
सांस्कृतिक अर्थ में वर्चस्व: सांस्कृतिक अर्थ में वर्चस्व का सम्बन्ध सहमति गढ़ने की ताकत से है। यहाँ 'वर्चस्व' का आशय है: सामाजिक, राजनीतिक एवं विशेषकर विचारधारा के धरातल पर किसी वर्ग की बढ़त अथवा दबदबा। कोई प्रभुत्वशाली वर्ग अथवा देश अपने प्रभाव में रहने वालों को इस तरह सहमत कर सकता है कि वे भी सम्पूर्ण विश्व को उसी नजरिये से देखें जिस नजरिये से वह देखता है। इससे प्रभुत्वशाली वर्ग या देश की बढ़त और वर्चस्व स्थापित होता है।

विश्व राजनीति के दायरे में वर्चस्व का अर्थ - विश्व: राजनीति के दायरे में वर्चस्व के इस अर्थ को लागू करें तो स्पष्ट होगा कि प्रभुत्वशाली देश केवल सैनिक शक्ति से ही काम नहीं लेता बल्कि वह अपने प्रतिद्वन्द्वी और अपने से कमजोर देशों के व्यवहार को अपनी इच्छानुसार बनाने के लिए विचारधारा से जुड़े साधनों को उपयोग में लेता है। कमजोर देशों के व्यवहार को इस प्रकार प्रभावित किया जाता है कि उससे सबसे शक्तिशाली देश के हितों की पूर्ति हो। इस तरह प्रभुत्वशाली देश जोर-जबर्दस्ती और रजामन्दी दोनों ही तरीकों से काम लेते हैं। सामान्यतया रजामन्दी का तरीका जोर-जबर्दस्ती से अधिक सफल सिद्ध होता है।

सांस्कृतिक अर्थ में अमेरिकी वर्चस्व: वर्तमान विश्व में संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रभाव केवल सैनिक एवं आर्थिक शक्ति के बल पर ही नहीं है बल्कि अमेरिका की सांस्कृतिक क्षेत्र में उपस्थिति भी इसका एक महत्त्वपूर्ण कारण है। यह सत्य है कि आज अच्छे जीवन और व्यक्तिगत सफलता के बारे में जो धारणाएँ सम्पूर्ण विश्व में प्रचलित हैं, विश्व के अधिकांश लोगों एवं समाजों ने जो सपने देखें हैं - वे सब 20वीं शताब्दी के संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रचलित व्यवहार, बर्ताव के ही प्रतिबिम्ब दिखाई देते हैं। यदि देखा जाये तो अमेरिकी संस्कृति बड़ी लोक - लुभावनी है और यही कारण है कि यह सबसे अधिक शक्तिशाली है। अमेरिकी वर्चस्व का यह सांस्कृतिक पहलू है कि जहाँ जोर-जबर्दस्ती से नहीं बल्कि सहमति से अपनी बात मनवायी जाती है। 

धीरे - धीरे समय गुजरने के साथ हम उसके इतने अभ्यस्त हो जाते हैं कि अब हम उसे उतना ही सहज मानते हैं; जितना अपने आस-पास के पेड़ - पौधों, पशु-पक्षियों एवं नदी आदि को। - उदाहरण के लिए, तत्कालीन सोवियत संघ की एक सम्पूर्ण पीढ़ी के लिए नीली जीन्स 'अच्छे जीवन' की आकांक्षाओं का प्रतीक बन गयी थी-एक ऐसा अच्छा जीवन जो उस समय सोवियत संघ में उपलब्ध नहीं था। . शीतयुद्ध के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका को यह महसूस हुआ कि सैनिक शक्ति के दायरे में संगठित संघ को परास्त करना बहुतं अधिक मुश्किल है।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने ढाँचागत शक्ति एवं सांस्कृतिक शक्ति का प्रयोग कर सोवियत संघ से बाजी मारी। तत्कालीन सोवियत संघ की केन्द्रीकृत व नियोजित समाजवादी अर्थव्यवस्था इसके लिए आन्तरिक आर्थिक संगठन की एक वैकल्पिक मॉडल तो थी, लेकिन सम्पूर्ण शीतयुद्ध की अवधि के दौरान विश्व की अर्थव्यवस्था पूँजीवादी तर्ज पर संचालित हुई। 

संयुक्त राज्य अमेरिका ने सबसे बड़ी विजय सांस्कृतिक प्रभुत्व के दायरे में प्राप्त की। तत्कालीन सोवियत संघ में अमेरिकी नीली जीन्स के प्रति दीवानगी इस बात को स्पष्ट प्रकट करती है कि अमेरिका एक सांस्कृतिक उत्पादन के बल पर तत्कालीन सोवियत संघ की दो पीढ़ियों के मध्य दूरियाँ उत्पन्न करने में पूरी तरह सफल रहा। इस सब बातों में अमेरिका का सांस्कृतिक वर्चस्व स्पष्ट रूप से प्रकट होता है।

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प्रश्न 8. 
भारत के संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कैसे सम्बन्ध होने चाहिए, इससे सम्बन्धित भारत में प्रचलित किन्हीं तीन दृष्टिकोणों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
भारत के अमेरिका के सम्बन्धों के प्रारूप को तय कर पाना कोई सरल कार्य नहीं है। इससे सम्बन्धित भारत में निम्नलिखित तीन सम्भावित रणनीतियों पर बहस जारी है।
1. कुछ भारतीय विद्वान, जो अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति को सैन्य शक्ति के सन्दर्भ में देखते: समझते हैं, भारत-अमेरिका की बढ़ती हुई नजदीकी से भयभीत हैं। इन विद्वानों की राय है कि भारत को वाशिंगटन से अपना अलगाव बनाए रखते हुए अपना ध्यान अपनी राष्ट्रीय शक्ति को बढ़ाने पर केन्द्रित करना चाहिए।

2. कुछ विद्वानों का मत है कि भारत: अमेरिका के हितों में लगातार बढ़ रहा मेलजोल भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर है। अतः भारत को अमेरिकी वर्चस्व का फायदा उठाने वाली राजनीति अपनानी चाहिए। इन विद्वानों के मतानुसार दोनों देशों के आपसी हितों का मेल ही तथा भारत अपने लिए सबसे अच्छा विकल्प खोजे। इन विद्वानों की राय में अमेरिका विरोधी रणनीति बेकार सिद्ध होगी तथा भविष्य में यह भारत के लिए हानिकारक होगी।

3. उक्त दोनों तरह के विद्वानों से अलग कुछ विद्वानों का मत है कि भारत को अपनी अगुवाई में विकासशील देशों का गठबन्धन बनाना चाहिए। यह गठबन्धन कुछ वर्षों बाद शक्तिशाली हो जाएगा तथा अमेरिकी वर्चस्व का प्रतिकार करने में सक्षम होगा। है। संभवतः भारत तथा अमेरिका के मध्य सम्बन्ध इतने जटिल हैं कि किसी एक रणनीति पर निर्भर रहना सही नहीं होगा। अतः भारत को अमेरिका से निर्वाह करने के लिए विदेश नीति की कई रणनीतियों का एक समुचित मेल तैयार करना होगा।

प्रश्न 9. 
विश्व राजनीति में संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्चस्व पर कैसे अंकुश लगाया जा सकता है?
अथवा 
वर्चस्व से निपटने के लिए किन्हीं दो रणनीतियों की व्याख्या कीजिए।
"अमेरिकी वर्चस्व का प्रतिरोध ही इसके प्रतिकार का एकमात्र विकल्प है।" वर्चस्व विरोधी अन्य रणनीतियों से इसकी तुलना करके, इस कथन को न्यायसंगत ठहराइए।
अथवा
"वर्चस्व पर काबू पाने के लिए प्रतिरोध ही एकमात्र विकल्प है।" इसकी तुलना अन्य वर्चस्व विरोधी रणनीतियों से करके इस कथन का औचित्य सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
अमेरिकी वर्चस्व पर अंकुश - संयुक्त राज्य अमेरिका के निरन्तर बढ़ते वर्चस्व ने यह सोचने पर बाध्य कर दिया है कि उसके वर्चस्व से किस प्रकार छुटकारा पाया जा सकता है। वास्तव में अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति सरकार विहीन राजनीति है। हालांकि युद्धों पर अंकुश लगाने वाले कुछ नियम एवं कानून अवश्य हैं, लेकिन ये युद्धों पर प्रभावी अंकुश लगाने में सक्षम नहीं हैं। सम्भवतया कोई भी देश ऐसा नहीं है जो अपनी सुरक्षा के प्रश्न को अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों के सहयोग से हल करना चाहेगा।

यह निर्विवाद सत्य है कि कोई भी देश अमेरिकी सैन्य शक्ति के समकक्ष नहीं है। हालांकि भारत, चीन तथा रूस जैसे विशाल देशों में अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती दे पाने की अपार सम्भावनाएँ हैं, लेकिन इन देशों के मध्य परस्पर आपसी मतभेदों एवं विभेदों के रहने से अमेरिका के खिलाफ कोई गठबन्धन होने की सम्भावनाएँ अत्यधिक कमजोर हैं।

विश्व - राजनीति में संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्चस्व से निपटने के लिए विभिन्न विद्वानों ने निम्नलिखित रास्ते सुझाए हैं।
(i) वर्चस्व तन्त्र में रहते हुए अवसरों का लाभ उठाया जाए: विभिन्न विद्वानों का अभिमत है कि वर्चस्व-जनित अवसरों का लाभ उठाने की रणनीति अधिक उपयोगी होती है।

उदाहरणार्थ, आर्थिक वृद्धि दर को ऊँचा उठाने के लिए व्यापार को बढ़ावा, प्रौद्योगिकी का हस्तान्तरण तथा निवेश परमावश्यक है और अमेरिका के साथ कन्धे - से - कन्धा मिलाकर कार्य करने में सरलता होगी न कि उसका विरोध करने में। ऐसी परिस्थिति में यह परामर्श दिया जाता है कि सर्वाधिक शक्तिशाली देश के खिलाफ जाने की अपेक्षा उसके वर्चस्व तन्त्र में रहते हुए अवसरों का भरपूर लाभ उठाना कहीं उचित एवं सार्थक रणनीति है। इसे बैंडवैगन अर्थात् 'जैसी बहे बयार पीठ तैसी कीजै' की रणनीति कहा जाता है।

(ii) वर्चस्व वाले देश से दूर रहने की कोशिश करना: विश्व के देशों के समक्ष एक विकल्प यह भी है कि वे स्वयं अपने आपको छुपा कर रखें। इसका अभिप्राय दबदबे वाले देश से जहाँ तक हो सके दूर-दूर रहना होता है। इस व्यवहार के विभिन्न उदाहरण हैं। चीन, रूस तथा यूरोपीय संघ सभी किसी न किसी प्रकार से अपने आपको अमेरिकी नजरों में आने से बचा रहे हैं। इस प्रकार ये देश स्वयं अपने आपको संयुक्त राज्य अमेरिका के किसी बिना कारण क्रोध की चपेट में आने से स्वयं को बचाते हैं।

हालांकि मध्यम श्रेणी के अन्तर्गत आने वाले शक्तिशाली देशों के लिए यह रणनीति अधिक लम्बी समयावधि तक काम नहीं आएगी। छोटे देशों के लिए यह संगत तथा आकर्षक रणनीति सिद्ध हो सकती है, लेकिन यह कल्पना शक्ति से बाहर की बात है कि भारत, चीन तथा रूस जैसे विशाल देश अथवा यूरोपीय संघ जैसा बड़ा जमावड़ा स्वयं अपने आपको लम्बी समयावधि तक अमेरिकी दृष्टि से बचाए रख सकें।

(iii) राज्येतर संस्थाएँ अमेरिकी वर्चस्व से निपटने के लिए आगे आयेंगी: कुछ विद्वानों का अभिमत है कि अमेरिकी वर्चस्व का प्रतिकार कोई देश अथवा देशों के समूह कर ही नहीं पाएगा क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में विश्व के सभी राष्ट्र अमेरिकी शक्ति के समक्ष स्वयं को बौना समझते हुए लाचार हैं। लोगों की मान्यता है कि राज्येतर संस्थाएँ अमेरिकी वर्चस्व से निपटने के लिए आगे आयेंगी। अमेरिकी वर्चस्व को आर्थिक तथा सांस्कृतिक धरातल पर चुनौती दी जा सकती है। 

यह चुनौती स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक आन्दोलनों तथा जनमत के परस्पर मिलने से सम्भव हो पाएगी। मीडिया, बुद्धिजीवी, कलाकार तथा लेखकों इत्यादि का एक वर्ग अमेरिकी वर्चस्व के प्रतिरोध के लिए आगे आएगा। ये राज्येतर संस्थाएँ विश्वव्यापी नेटवर्क निर्मित कर सकती हैं; जिसमें अमेरिकी जनसमुदाय भी अपने सहभागिता करेगा और साथ-साथ मिलकर अमेरिकी गलत नीतियों की आलोचना तथा प्रतिरोध किया जा सकेगा।

हमने विश्व - ग्राम की बात सुन रखी है। इस विश्व - ग्राम में एक चौधरी और हम सभी उसके पड़ोसी हैं। यदि इस चौधरी का हमारे प्रति आचरण असहनीय हो जाए तो भी विश्व-ग्राम से चले जाने का विकल्प हमारे पास नहीं है क्योंकि यह एकमात्र गाँव है जिसे हम जानते हैं और हमें यह भी ज्ञात है कि हमारे रहने के लिए भी एकमात्र यही स्थल शेष बचा है तो ऐसी विषम परिस्थितियों में हमारे समक्ष एक विकल्प यही शेष बचता है कि हम ऐसे चौधरी का प्रतिरोध करें।

स्रोत पर आधारित प्रश्न:

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए कार्टून का अध्ययन कीजिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।  
RBSE Class 12 Political Science Important Questions Chapter 3 समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व 1
1. यह बलिष्ठ सैनिक कौन - से देश का प्रतिनिधित्व करता है? 
2. सैनिक की वर्दी पर इतने देशों के नाम क्यों लिखे गए हैं? 
3.  यह कार्टून अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय को क्या संदेश देता है?
उत्तर:

  1. यह बलिष्ठ सैनिक अमेरिका का प्रतिनिधित्व करता है। 
  2. 19 मार्च, 2003 को अमेरिकी अगुवाई वाले 'कॉअलिशन ऑफ वीलिंग्स' में 40 से अधिक देशों ने 'ऑपरेशन इराकी फ्रीडम' कूटनाम से इराक पर सैन्य हमला किया। इस कारण ही सैनिक की वर्दी पर इतने देशों के नाम लिखे गए हैं।
  3. यह कार्टून अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय को संदेश देता है कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ समस्त दुनिया को अपने अध गीन रखने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने में हिचकिचाता नहीं है।

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गये इस अध्याय से सम्बन्धित:

प्रश्न 1. 
निम्नलिखित में से किस घटना के पश्चात् अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान शासन के साथ सम्बन्ध समाप्त कर दिए?
(अ) अमेरिका पर 9/11 का आक्रमण 
(ब) केन्या तथा तंजानिया में अमेरिकी दूतावासों पर आक्रमण 
(स) रियाद में अमेरिकी सैन्य मिशन मुख्यालय पर आक्रमण
(द) अफगानिस्तान से होकर गुजरने वाली गैस पाइप लाइन पर वार्ता का विफल होना। 
उत्तर:
(अ) अमेरिका पर 9/11 का आक्रमण 

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प्रश्न 2. 
सर जॉन चिल्कॉट आयोग ने दोषी पाया। 
(अ) अफगानिस्तान युद्ध में अमेरिका के नेतृत्व में नाटो के आक्रमण में यू.के. का आचरण 
(ब) वर्ष 2003 में इराक युद्ध पर यू.के. का आचरण
(स) वर्ष 2003 में इराक पर आक्रमण करने के लिए अमेरिका को
(द) सीरिया पर आक्रमण करने के लिए रूस को।
उत्तर:
(ब) वर्ष 2003 में इराक युद्ध पर यू.के. का आचरण

प्रश्न 3. 
विश्व राजनीति में शीतयुद्ध के समापन का मुख्य कारक क्या था?
(अ) अमेरिका पर आतंकी हमला
(ब) सोवियत संघ का विघटन 
(स) क्यूबा मिसाइल संकट
(द) प्रथम खाड़ी युद्ध 
उत्तर:
(ब) सोवियत संघ का विघटन 

प्रश्न 4. 
ऑपरेशन एन्ड्यूरिंग फ्रीडम 2001 सम्बन्धित है। 
(अ) इराक से आतंकवादियों का हटाया जाना
(ब) अफगानिस्तान से तालिबान साम्राज्य को हटाया जाना 
(स) रूस से क्रीमिया सेना को हटाया जाना
(द) गाजा पट्टी से अरब को हटाया जाना 
उत्तर:
(ब) अफगानिस्तान से तालिबान साम्राज्य को हटाया जाना 

RBSE Class 12 Political Science Important Questions Chapter 3 समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व

प्रश्न 5. 
'स्ट्रेच्यू आफ लिबर्टी' संयुक्त राज्य अमेरिका को किस देश ने भेंट की थी? 
(अ) इंग्लैण्ड
(ब) फ्रांस 
(स) जर्मनी
(द) स्विट्जरलैण्ड 
उत्तर:
(ब) फ्रांस 

प्रश्न 6. 
राष्ट्रपति बुश द्वारा वर्ष 2002 में अपने स्टेट ऑफ यूनियन भाषण में 'एक्सिस ऑफ इविल' के रूप में किन देशों की पहचान की गई थी?
(अ) रशिया, चीन, ईरान
(ब) ईवान, इराक, सीरिया 
(स) क्यूबा, वेनेजुएला, रशिया
(द) इराक, ईरान, उत्तरी कोरिया 
उत्तर:
(द) इराक, ईरान, उत्तरी कोरिया 

प्रश्न 7. 
अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देने वाले क्षेत्रीय समूह सी. ई. एल. ए. सी. का सम्बन्ध विश्व के किस भाग से है?
(अ) दक्षिण अमेरिका
(ब) एशिया-प्रशान्त 
(स) दक्षिण-पूर्व एशिया
(द) मध्य एशिया 
उत्तर:
(अ) दक्षिण अमेरिका

प्रश्न 8. 
निम्नलिखित में से ब्रेटन वुड्स सम्मेलन के परिणामस्वरूप क्या हुआ?
(अ) संयुक्त राष्ट्र का गठन
(ब) राष्ट्र संघ का गठन 
(स) आण्विक प्रसारण रोकने के लिए संस्थान 
(द) विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का गठन। 
उत्तर:
(द) विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का गठन। 

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प्रश्न 9. 
संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिण कैलिफोर्निया में स्थित 'मृतक घाटी' डेथवैली) निम्नलिखित में से किसका उदाहरण है?
(अ) अपनतीय घाटी का
(ब) अभिनति घाटी का 
(स) पूर्ववर्ती घाटी का
(द) रिफ़्ट घाटी का। 
उत्तर:
(द) रिफ़्ट घाटी का। 

Prasanna
Last Updated on Jan. 16, 2024, 9:21 a.m.
Published Jan. 15, 2024