RBSE Class 12 Home Science Important Questions Chapter 7 प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा

Rajasthan Board RBSE Class 12 Home Science Important Questions Chapter 7 प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा Important Questions and Answers.

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RBSE Class 12 Home Science Important Questions Chapter 7 प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा

बहुचयनात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. 
8-12 माह का छोटा बच्चा अनजान व्यक्ति को देखकर उसके प्रति किस प्रकार का भाव प्रकट करता है? 
(अ) भय 
(ब) क्रोध 
(स) लगाव 
(द) प्रसन्नता 
उत्तर:
(अ) भय

प्रश्न 2. 
जब बच्चा चलना और दौड़ना, चीजों को उलटना-पलटना और बोलना सीख लेता है तो वह जिसके साथ सक्रिय भागीदारी करने में सक्षम हो जाता है, वह है- 
(अ) माँ 
(ब) दादी 
(स) पिता 
(द) परिवेश 
उत्तर:
(द) परिवेश

प्रश्न 3. 
छोटे बच्चों के लिए सीखने के सबसे अनुकूल परिवेश की निम्न में जो विशेषता नहीं होती, वह है-
(अ) सरक्षित 
(ब) औपचारिक 
(स) अनौपचारिक 
(द) खेल सामग्रियों से यक्त 
उत्तर:
(ब) औपचारिक

प्रश्न 4. 
बाल-केन्द्रित उपागम और खेल-खेल में सीखने का तरीका छोटे बच्चों के लिए सबसे उपयुक्त होता है, क्योंकि- 
(अ) यह पढ़ाई को रुचिकर बना देता है। 
(ब) बच्चा, दूसरे बच्चों का साथ पसंद करता हैं। 
(स) इसमें बच्चा बहुत तेजी से काम करना सीखता है। 
(द) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 5. 
प्रारंभिक बाल्यावस्था किस आयु तक की अवस्था है- 
(अ) जन्म से लेकर 1 वर्ष तक की अवस्था। 
(ब) जन्म से लेकर 3 वर्ष तक की अवस्था। 
(स) जन्म से लेकर आठ वर्ष तक की आयु की अवस्था। 
(द) जन्म से लेकर 2 वर्ष तक की अवस्था। 
उत्तर:
(स) जन्म से लेकर आठ वर्ष तक की आयु की अवस्था।

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रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए- 

1. प्रारंभिक बाल्यावस्था को सामान्यतया दो भागों में बाँटा जाता है-एक, जन्म से लेकर 3 वर्ष तक और दूसरे, 3 वर्ष से ................ वर्ष तक। 
2. डे केयर सेन्टर और क्रेच सामान्यतः .............. के कार्यक्रम होते हैं। 
3. भारत सरकार ने विद्यालय-पूर्व बच्चों की आवश्यकताओं को ............... द्वारा विद्यालय पूर्व शिक्षा देकर पूरा किया है। 
4. .................... को बच्चों की क्षमताओं के बारे में दुनिया सम्बन्धी जानकारी की अपेक्षा अधिक जानकारी होनी चाहिए। 
5. नर्सरी ............... प्रशिक्षण एक ऐसा पाठ्यक्रम है जो प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करता है। 
6. विद्यालय पूर्व शिक्षक को अकसर अपनी पाठ योजनाओं, अपनी कार्यनीतियों और तकनीकों को छोटे बच्चों की जरूरतों के अनुसार ................ पड़ता है। 
7. 3 वर्ष तक की अवस्था में बच्चे में प्रमुख देखभालकर्ता की अनुपस्थिति में .............. का बोध विकसित हो जाता है। 
8. अधिकांश मामलों में बच्चे कुछ वर्षों तक मात्र अपने ............. में ही पलते हैं। 
उत्तर:
1. आठ 
2. पूरे दिन 
3. आंगनबाड़ी 
4. विद्यालय पूर्व शिक्षक 
5. अध्यापक 
6. बदलना 
7. सुरक्षा 
8. परिवार 

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न- 

प्रश्न 1. 
बच्चा अपनी माँ से अत्यधिक लगाव क्यों रखता है? 
उत्तर:
बच्चा अपनी माँ से अत्यधिक लगाव रखता है क्योंकि वह जन्म से ही अधिकतर रूप में उसकी देखभाल करती है। 

प्रश्न 2. 
8-12 माह का छोटा बच्चा अनजान व्यक्ति के प्रति भय प्रदर्शित करता है। यह भय प्रदर्शन क्या दर्शाता 
उत्तर:
बच्चे का यह भय परिचित चेहरों को उसकी पहचानने की क्षमता को दर्शाता है। 

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प्रश्न 3. 
बच्चों का प्रायः अपनी माँ या देखभाल करने वाले व्यक्ति से चिपके रहने का व्यवहार जब छूट जाता है, तो उसकी यह स्थिति क्या दर्शाती है? 
उत्तर:
उसकी उपरोक्त स्थिति यह दर्शाती है कि बच्चे में प्रमुख देखभालकर्ता की अनुपस्थिति में भी सुरक्षा का बोध विकसित हो जाता है। 

प्रश्न 4. 
क्रेच (शिश केन्द्र) क्या है? 
उत्तर:
शिशु केन्द्र या क्रेच एक संस्थागत शिशु देखभाल की व्यवस्था है। इसे प्राथमिक देखभालकर्ता के विकल्प के रूप में देखा जाता है। 

प्रश्न 5. 
यदि हम छोटे बच्चे को एक जगह बैठाकर बड़े बच्चों के औपचारिक विद्यालय की भाँति पढ़ने को बाध्य करेंगे तो इससे क्या हानि होगी? 
उत्तर:
छोटे बच्चे को औपचारिक विद्यालय की भाँति एक स्थान पर बैठाकर पढ़ने को बाध्य करने पर उसकी जिज्ञासा खत्म हो जाएगी, वह बेचैन और असुरक्षित महसूस करेगा। 

प्रश्न 6. 
छोटे बच्चों को सीखने के लिए सबसे अनुकूल परिवेश कैसा होना चाहिए? 
उत्तर:
छोटे बच्चों को सीखने के लिए सबसे अनुकूल परिवेश वह है जो अनौपचारिक, सुरक्षित, निरापद, प्रेमपूर्ण, विविध प्रकार के व्यक्तियों तथा खेल सामग्रियों से युक्त हो। 

प्रश्न 7. 
ऐसे बच्चे जिन्हें सीखने के लिए अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होती है, उन्हें किस प्रकार का परिवेश लाभदायक समझा जाता है? 
उत्तर:
ऐसे बच्चे जिन्हें सीखने के लिए अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होती है, उन्हें विद्यालय पूर्व परिवेश बहुत लाभदायक होता है। 

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प्रश्न 8. 
शैशवावस्था क्या है?
उत्तर:
शैशवावस्था जन्म से लेकर एक वर्ष की आयु तक की अवधि है। कुछ विशेषज्ञ शैशवावस्था को 2 वर्ष तक मानते हैं। 

प्रश्न 9. 
शैशवावस्था बच्चे की किस प्रकार की अवधि है? 
उत्तर:
शैशवावस्था अवधि बच्चे की सामान्यतः माता-पिता अथवा प्रमुख देखभाल करने वाले किसी अन्य व्यक्ति पर अत्यधिक निर्भरता की अवधि है। 

प्रश्न 10. 
शैशवावस्था में बच्चे की देखभाल परिवार के अतिरिक्त दो अन्य संस्थागत वैकल्पिक व्यवस्थाओं के नाम लिखिए। 
उत्तर:

  • शिशु केन्द्र (क्रेच) 
  • दिवस देखभाल केन्द्र (डेकेयर सेन्टर) 

प्रश्न 11. 
शिशु केन्द्र या दिवस देखभाल केन्द्र में शिक्षक व सहायकों में कौनसी योग्यताएँ होनी चाहिए? 
उत्तर:
इन शिशु संस्थाओं में शिक्षक व सहायकों को बहुत छोटे बच्चों की देखभाल, उनकी सुरक्षा, उनके खाने पीने, शौचालय आदतों, भाषा-विकास तथा सामाजिक व भावात्मक जरूरतों को समझने व सिखाने के लिए प्रशिक्षित होना चाहिए। 

प्रश्न 12. 
टॉडलर कौनसे बच्चों को कहा जाता है और क्यों? 
उत्तर:
दो से तीन वर्ष के बच्चों को टॉडलर भी कहा जाता है क्योंकि इस उम्र के छोटे बच्चे फुदककर चलते हैं। 

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प्रश्न 13. 
तीन वर्ष से ऊपर के बच्चे को 'विद्यालय पूर्व बच्चा' क्यों कहा जाता है? 
उत्तर:
तीन वर्ष से ऊपर के बच्चे को विद्यालय-पूर्व-बच्चा इसलिए कहा गया है क्योंकि वह अब घर से बाहर के परिवेश में रहने के लिए तैयार है। 

प्रश्न 14. 
विद्यालय पूर्व बच्चों की शिक्षा व देखभाल के किन्हीं तीन प्रकार के संस्थागत नामों का उल्लेख कीजिए। 
उत्तर:

  • नर्सरी स्कूल 
  • मॉन्टेसरी स्कूल 
  • आँगनबाड़ी। 

लघूत्तरात्मक प्रश्न- 

प्रश्न 1. 
'नन्हे शिशु बहुत छोटी उम्र से ही सीखना शुरू कर देते हैं।' इस कथन को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर:
नन्हे शिशु बहुत छोटी उम्र से ही सीखना शुरू कर देते हैं, इसे निम्न उदाहरणों द्वारा स्पष्ट किया गया है- 

  • अपने आस-पास की दुनिया के बारे में नयी बातें सीखने के साथ ही छोटा बच्चा अपने परिवार के सदस्यों, विशेषकर अपने माता-पिता, भाई-बहिन के साथ ही लगाव विकसित करने लगता है।
  • इसके बाद छोटा बच्चा परिवार के अन्य सदस्यों और उन लोगों को भी पहचानने लगता है, जिनसे वह नियमित रूप से मिलता है। 
  • 8-12 माह का बच्चा अनजान व्यक्ति के प्रति भय प्रकट करता है। इसका आशय यह है कि वह परिचित चेहरों को पहचानने की क्षमता का प्रदर्शन है। 
  • इसके बाद बच्चा माँ से चिपकना बंद कर देता है। इसका अभिप्राय यह है कि उसमें प्रमुख देखभालकर्ता की अनुपस्थिति में भी सुरक्षा का बोध विकसित हो गया है। 
  • इसके साथ ही साथ बच्चा चलना, चीजों को ठीक से पकड़ना, शरीर को संतुलित रखना तथा मल-मूत्र विसर्जन पर नियंत्रण भी सीखता है।

प्रश्न 2.
किन शिशुओं के लिए क्रेच (शिशु केन्द्र) की आवश्यकता होती है? 
उत्तर:
एकल परिवारों में, जहाँ शिशु के माता-पिता दोनों नौकरी करते हैं, उन्हें अपने शिशुओं के देखभाल के लिए शिशु केन्द्र की आवश्यकता होती है। 

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प्रश्न 3. 
शिशु केन्द्र किस प्रकार का हो सकता है और इसे किस प्रकार के विकल्प के रूप में देखा जाता है? 
उत्तर:
शिशु केन्द्र (क्रेच) के लिए कोई अनौपचारिक पारिवारिक देखभाल की व्यवस्था हो सकती है जिसमें आस-पड़ोस की कोई महिला अपने घर में व्यवसाय के रूप में शिशु केन्द्र चला सकती है अथवा यह कोई संस्थागत केन्द्र हो सकता है, जहाँ बच्चों की देखभाल की जाती है। 

शिशु केन्द्र को प्राथमिक देखभालकर्ता के विकल्प के रूप में देखा जाता है। यद्यपि, इन्हें बच्चे के सीखने और विकास की बेहतरी के लिए आवश्यक अनुभव के रूप में नहीं देखा जा सकता है। 

प्रश्न 4. 
जब बच्चा 3 वर्ष का हो जाता है तो सामान्यतः उसकी गतिविधियाँ और अनुभव किस प्रकार बढ़ने लगते हैं? 
उत्तर:
3 वर्ष का होने तक बच्चा चलना और दौड़ना, चीजों को उलटना-पलटना और बोलना सीख लेता है तो वह परिवेश के साथ सक्रिय साझेदारी करने में सक्षम हो जाता है। यथा- 

  • अब वह अपने आस-पास के लोगों और चीजों के साथ परस्पर व्यवहार से समस्त जानकारी एकत्र करता है, जो वह कर सकता है।
  • इस उम्र में मातृभाषा में उसका शब्द ज्ञान तेजी से बढ़ता है और उसके साथ ही उसकी प्राकृतिक वस्तुओं, जैसे-बालू, जल, पक्षी और अन्य सामग्रियों की समझ बढ़ती है। 
  • अब उसमें और अधिक जानने की जिज्ञासा प्रबल हो जाती है। कोई चीज देखने पर वह अकसर बड़ों से पूछता है कि 'ऐसा क्यों है?' 

प्रश्न 5. 
3 वर्ष के बाद के बच्चों को सीखने के लिए किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है? 
उत्तर:
3 वर्ष के बाद बच्चों अर्थात् विद्यालय पूर्व के बच्चों के लिए सीखने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक है- 
(i) अनुकूल परिवेश का होना-इस उम्र में बच्चों को सीखने के लिए अनुकूल परिवेश प्रदान करना आवश्यक है। अनुकूल परिवेश वह है, जो सुरक्षित, निरापद, प्रेमपूर्ण, विविध प्रकार के व्यक्तियों और खेल सामग्रियों (खिलौने अथवा प्राकृतिक चीजों) से युक्त हो।

(ii) अनौपचारिक स्वरूप-इस उम्र में बच्चे पर उसकी सीखने की क्षमता से अधिक बोझ न डाला जाये। यदि हम बच्चे को एक जगह बैठाकर बड़े बच्चों के औपचारिक विद्यालय की भाँति पढ़ने को बाध्य करते हैं तो उसकी जिज्ञासा खत्म हो जाएगी और बच्चा बेचैन और असुरक्षित महसूस करेगा। इसलिए इनकी शिक्षा का स्वरूप अनौपचारिक होना चाहिए।

प्रश्न 6. 
किसी अच्छे विद्यालय पूर्व केन्द्र की शिक्षा व देखभाल के छोटे बच्चों को क्या लाभ होते हैं? 
उत्तर:
किसी अच्छे विद्यालय पूर्व केन्द्र की पढ़ाई व अन्य अनुभव छोटे बच्चों के लिए अत्यधिक लाभदायक पाए गए हैं। यथा- 

  • विद्यालय-पूर्व केन्द्र का बाल-केन्द्रित उपागम और खेल-खेल में सीखने का तरीका पढ़ाई को रुचिकर बना देता है। यह तरीका छोटे बच्चों के लिए सबसे उपयुक्त होता है। 
  • बच्चा, दूसरे बच्चों का साथ पसंद करता है और बहुत तेजी से काम करना सीखता है। अतः बच्चे साथियों के साथ बहुत जल्दी सीखते हैं। 
  • जो बच्चे कठिन परिस्थितियों में पलते हैं अथवा जिन्हें सीखने के लिए अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होती है, उनके लिए विद्यालय-पूर्व परिवेश बहुत लाभदायक होता है। 
  • विद्यालय-पूर्व केन्द्र छोटे बच्चों को विद्यालय में पढ़ने के लिए तैयार करते हैं। 

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प्रश्न 7. 
शैशवावस्था कौनसी होती है? 
उत्तर:
शैशवावस्था-शैशवावस्था जन्म से लेकर एक वर्ष की आयु तक की अवधि है, कुछ विशेषज्ञ शैशवावस्था को 2 वर्ष तक मानते हैं। इस अवस्था में बच्चा अपनी प्रत्येक जरूरत के लिए वयस्कों पर निर्भर करता है। यह अवधि वयस्कों, सामान्यतः माता-पिता अथवा प्रमुख देखभाल करने वाले किसी अन्य व्यक्ति पर अत्यधिक निर्भरता की अवधि है, जो दादी-नानी अथवा अन्य कोई सहायक हो सकता है। 

प्रश्न 8. 
ऐसी स्थिति में, जब माँ घर के बाहर नौकरी करती है शैशवावस्था में शिशु की देखभाल की वैकल्पिक व्यवस्थाएँ, किस प्रकार की हो सकती हैं? 
उत्तर:
ऐसी स्थिति में जब माँ घर के बाहर नौकरी करती हो, तो शिशु की देखभाल वैकल्पिक रूप से करने वाले व्यक्ति द्वारा की जाती है। ये वैकल्पिक व्यवस्थाएँ इस प्रकार हो सकती हैं- 

  • शिशु की देखभाल करने वाला या तो परिवार का कोई सदस्य हो सकता है अथवा वेतन पर रखा गया कोई व्यक्ति हो सकता है। 
  • वैकल्पिक देखभाल की व्यवस्था घर में अथवा किसी संस्था अथवा शिशु केन्द्र (क्रेच) में हो सकती है। क्रेच को विशेष रूप से शिशुओं और छोटे बच्चों की घर में देखभाल करने वालों की अनुपस्थिति में देखभाल के लिए बनाया गया होता है। 
  • दिवस देखभाल केन्द्र (डे केयर सेन्टर) में भी शिशु एवं विद्यालय पूर्व के बच्चे शामिल होते हैं।

प्रश्न 9. 
क्रेच तथा डे केयर सेंटर में शिक्षक व सहायकों की क्या विशेषताएँ होनी चाहिए? 
उत्तर:
देखभाल दिवस केन्द्र (डे केयर सेंटर) तथा शिशु केन्द्र (क्रेच) सामान्यतः पूरे दिन के कार्यक्रम होते हैं। इन कार्यक्रमों में शिक्षक और सहायकों को बहुत छोटे बच्चों की देखभाल, उनकी सुरक्षा, उनके खाने-पीने, शौचालय आदतों, भाषा विकास, सामाजिक और भावनात्मक जरूरतों को समझने और सिखाने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होना चाहिए।

प्रश्न 10. 
किन्हीं दो प्रकार के नर्सरी (विद्यालय पूर्व) स्कूलों का उल्लेख कीजिए। 
उत्तर:
(1) मॉन्टेसरी स्कूल-छोटे बच्चों के लिए कुछ विद्यालय पूर्व स्कूल (नर्सरी स्कूल) अकसर मॉन्टेसरी ते हैं। ये ऐसे विद्यालय हैं जो प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के उन सिद्धान्तों पर आधारित हैं, जिनकी रूपरेखा विख्यात शिक्षाविद मारिया मॉन्टेसरी द्वारा बनाई गई है। 

(2) आंगनबाड़ी विद्यालय पूर्व शिक्षा-भारत सरकार ने इस आयु समूह की आवश्यकताओं को आँगनबाड़ी द्वारा विद्यालय पूर्व शिक्षा देकर पूरा किया है जो इसकी समेकित बाल विकास सेवाओं के अन्तर्गत कार्य करती हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों दोनों में आँगनवाड़ियाँ हैं। 

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प्रश्न 11. 
2005 एन.सी.एफ. के ई.सी.सी.ई. पर प्रकाशन के अनुसार ई.सी.सी.ई. के मार्गदर्शी सिद्धान्तों का उल्लेख कीजिए। 
उत्तर:
2005 एन.सी.एफ. के ई.सी.सी.ई. पर प्रकाशन के अनुसार ई.सी.सी.ई. के मार्गदर्शी सिद्धान्त निम्नलिखित हैं-

  • सीखने का आधार खेल हो। 
  • शिक्षा का आधार कला हो। 
  • बच्चों की विशिष्ट सोच-विशेषताओं को मान्यता देना। 
  • विशेषज्ञता के स्थान पर अनुभव को प्रमुखता। 
  • दैनिक नित्यचर्या में अच्छी जानकारी और चुनौतियों का अनुभव। 
  • औपचारिक तथा अनौपचारिक दोनों प्रकार की परस्पर बातचीत। 
  • पाठ विषयक और सांस्कृतिक स्रोतों का मेल। 
  • स्थानीय सामग्रियों, कला और ज्ञान का उपयोग। 
  • विकासात्मक रूप से उपयुक्त तरीके, लचीलापन तथा अनेकता। 
  • स्वास्थ्य, कल्याण तथा स्वस्थ आदतें। 

प्रश्न 12. 
बाल्यावस्था तथा विकासात्मक परिवर्तनों और चुनौतियों का प्रशिक्षण और जानकारी उन वयस्कों के लिए, जो प्रारंभिक बाल्यावस्था कार्यक्रमों का चयन अपनी जीविका हेतु करते हैं, अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों होती है? 
उत्तर:
ये प्रारंभिक बाल्यावस्था कार्यक्रमों का चयन अपनी जीविका हेतु करने वाले व्यावसायियों के लिए निम्न कारणों से अधिक महत्त्वपूर्ण होते हैं- 

  • प्रारंभिक बाल-देखभाल व्यावसायिक अपने बच्चों के अतिरिक्त अन्य बच्चों के प्रति भी उत्तरदायी होते हैं। 
  • बाल-देखभाल व्यावसायिकों के रूप में किए जाने वाले क्रियाकलाप उनके काम के भाग हाते हैं और उन्हें उसके लिए औपचारिक पहचान मिलती है। 
  • माता-पिता से भिन्न शिक्षक और देखभाल करने वालों पर उन बच्चों की देखभाल का दायित्व होता है जो उनकी संतान नहीं होते हैं। 
  • बच्चों के परिवार के सदस्यों के बड़े वयस्कजनों के समूह की भी उन पर जिम्मेदारी होती है, जिनकी वे देखभाल करते हैं। 
  • वे जिस संस्थान में काम करते हैं, उसकी और वृहत्तर समाज की भी जिम्मेदारी उन पर होती है। 

प्रश्न 13. 
विद्यालय पूर्व के बच्चों की शारीरिक देखभाल की आवश्यकता कम क्यों होती है? 
उत्तर:
विद्यालय पूर्व के बच्चों की शारीरिक देखभाल, जैसे-सफाई, खान-पान, शौच आदि की निगरानी करने की कम आवश्यकता होती है, क्योंकि बच्चा बोलने, मल और मूत्र विसर्जन की गतिविधियों पर नियंत्रण करने की क्षमता तथा अपने आप स्वयं खा-पी लेने की क्षमता विकसित कर लेता है। 

प्रश्न 14. 
विद्यालय-पूर्व के बच्चों की देखभाल और शिक्षा के लिए व्यावसायिकों को किन बातों पर अधिक ध्यान देना चाहिए? 
उत्तर:
विद्यालय-पूर्व के बच्चों के शिक्षकों व सहायकों को बच्चों की देखभाल व शिक्षा के लिए निम्न बातों पर अधिक ध्यान देना चाहिए- 

  • प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा के व्यावसायिकों को बच्चों और उनके कल्याण और अधिगम के प्रति प्रतिबद्ध होना चाहिए। 
  • शिक्षक को बच्चों को नयी चीजों को सीखने, प्राकृतिक घटनाओं का अनुभव करने तथा अनेक प्रकार के अनुभवों, जैसे शारीरिक, भाषायी, सामाजिक-भावनात्मक और अन्य अधिगम अनुभवों के दिलचस्प और रोमांचक अवसर प्रदान करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए। 
  • शिक्षक को उसकी रचनात्मक अभिव्यक्ति और खोज-बीन करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देना चाहिए। 
  • उसे यह भी देखना चाहिए कि बच्चे को दिया गया काम न तो बहुत आसान हो और न बहुत कठिन हो। 

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निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. 
प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा के कार्यक्षेत्र तथा जीविका के अवसरों पर एक लेख लिखिए। 
उत्तर:
प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का कार्यक्षेत्र
प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का कार्यक्षेत्र बहुत व्यापक है। यथा-

  • क्रेच-छोटे बच्चों (शिशुओं) के शिक्षक अथवा देखभालकर्ता के रूप में व्यक्ति शिशु केन्द्र में देखभालकर्ता के रूप में कार्य कर सकते हैं। 
  • नर्सरी स्कूल तथा दिवस देखभाल केन्द्र-इस क्षेत्र में प्रशिक्षित व्यक्ति नर्सरी या दिवस देखभाल केन्द्र के शिक्षक के रूप में काम कर सकते हैं। 
  • छोटे बच्चों के कार्यक्रम के दल-इस क्षेत्र में प्रशिक्षित व्यक्ति छोटे बच्चों के लिए कार्यक्रमों के लिए काम करने वाले दल के सदस्य के रूप में भी काम कर सकते हैं। 
  • सरकारी और गैर-सरकारी संगठन-अनेक सरकारी और गैर-सरकारी संगठन छोटे बच्चों के लिए अभियानों अथवा सेवाओं की योजना बनाने और संवर्धन के लिए भी वेतन में इस प्रकार के व्यावसायिकों की सेवाएँ लेते हैं। 
  • उद्यमी-इस क्षेत्र में प्रशिक्षित व्यक्ति एक उद्यमी के रूप में अपना बाल-देखभाल केन्द्र और शिक्षा सम्बन्धी कार्यक्रम चला सकते हैं। 
  • प्रशिक्षण संस्थान-अपनी शिक्षा और रुचि के अनुसार, इस क्षेत्र में प्रशिक्षित व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम में समन्वयक के रूप में अथवा इस विषय में शिक्षकों के प्रशिक्षक के रूप में काम कर सकते हैं।
  • शोध कार्य-आप इस क्षेत्र में शोध (पी.एच.डी.) कर शोध कार्यकर्ता बन सकते हैं।

उक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में उपलब्ध सामान्य सेवाएँ निम्नलिखित हैं-

  • शिशु केन्द्र 
  • दिवस देखभाल केन्द्र 
  • नर्सरी स्कूल 
  • गैर-सरकारी संगठन 
  • समेकित बाल विकास सेवाएँ 
  • प्रशिक्षण संस्थान 

जीविका के अवसर
इस क्षेत्र में प्रशिक्षित व्यक्ति के लिए जीविका के प्रमुख अवसर निम्नलिखित हैं-

  • नर्सरी स्कूल में शिक्षक। 
  • शिशु केन्द्रों तथा दिवस देखभाल केन्द्रों में देखभालकर्ता। 
  • छोटे बच्चों के लिए कार्यक्रमों के दल के सदस्य। 
  • सरकारी अथवा गैर-सरकारी संगठनों द्वारा बच्चों के लिए आयोजित अभियानों अथवा सेवाओं की योजना बनाने और संवर्धन करने के लिए व्यावसायिक। 
  • बाल सम्बन्धी क्रियाकलापों में उद्यमी शिविर, शैक्षिक पिकनिक, क्रिया क्लब, विद्यालय पूर्व शिक्षा केन्द्र।
  • उच्च शिक्षा स्नातकोत्तर डिप्लोमा या डिग्री, बाद में इस क्षेत्र में अनुसंधान सहित पी.एच.डी.।
Prasanna
Last Updated on July 19, 2022, 12:39 p.m.
Published July 18, 2022